National

फिलीपींस के बाद भारत कैसे बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता? जानिए इसकी बड़ी वजहें

भारत आज वैश्विक समुद्री उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। हाल ही में काला सागर क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों में भारतीय क्रू सदस्यों की मौत के बाद समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। फिलीपींस के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक (सीफेयरर) उपलब्ध कराने वाला देश है और वैश्विक शिपिंग उद्योग में उसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 25.65 लाख नाविक कार्यरत हैं। इनमें सबसे अधिक नाविक फिलीपींस से हैं, जबकि भारत दूसरे स्थान पर है। चीन, रूस और इंडोनेशिया भी शीर्ष देशों में शामिल हैं। दुनिया के पांच प्रमुख देश मिलकर वैश्विक नाविक समुदाय का 56 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं।

भारत के इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। देश की लंबी तटरेखा और समुद्री परंपरा ने तटीय राज्यों के युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़े रखा है। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में समुद्री कार्यों का लंबा इतिहास रहा है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित हुई है।

भारत की बड़ी युवा आबादी भी इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा बेहतर करियर की तलाश में समुद्री क्षेत्र का रुख करते हैं। जहाजों पर कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता, बेहतर वेतन और अंतरराष्ट्रीय अनुभव भारतीय युवाओं को वैश्विक शिपिंग कंपनियों की पहली पसंद बनाते हैं।

भारतीय नाविकों की अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ भी उन्हें प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाती है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर विभिन्न देशों के लोग साथ काम करते हैं, जहां अंग्रेजी प्रमुख संवाद भाषा होती है। भारतीय नाविक विदेशी अधिकारियों और बहुराष्ट्रीय क्रू के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम होते हैं।

देश में विकसित समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली भी इस सफलता की अहम वजह है। भारत के कई समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों में डेक कैडेट, मरीन इंजीनियर, इलेक्ट्रो-टेक्निकल अधिकारी और अन्य विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाता है। आधुनिक जहाजों में डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन और उन्नत नेविगेशन सिस्टम के बढ़ते उपयोग के कारण भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।

भारतीय नाविकों को अनुशासन, जिम्मेदारी और टीमवर्क के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि अब भारतीय केवल चालक दल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में कप्तान, मुख्य इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी के रूप में भी वैश्विक जहाजों का नेतृत्व कर रहे हैं।

हालांकि, इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। सभी प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता समान नहीं है, प्रशिक्षण की लागत कई युवाओं के लिए बाधा बनती है और लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं। महिलाओं की भागीदारी भी अभी अपेक्षाकृत कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर और नाविकों की सुरक्षा व कल्याण पर और अधिक ध्यान दिया जाए, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक शिपिंग उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण टैलेंट हब बनने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता है। भारतीय नाविक न केवल विश्व व्यापार को गति दे रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा भी मजबूत कर रहे हैं।

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button