National

सिर्फ ऐलान से खत्म नहीं होंगे छात्रों पर दर्ज केस, FIR वापसी के लिए अपनानी होगी कानूनी प्रक्रिया

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने पर सरकार सहमत हो गई है। हालांकि, केवल सरकारी घोषणा से मुकदमे खत्म नहीं हो जाते। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत मुकदमे वापस लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है और अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

36 दिन के आंदोलन में दर्ज हुईं कई FIR

13 जून से 25 जुलाई 2026 तक चले आंदोलन के दौरान केवल दिल्ली में ही 15 से 20 एफआईआर दर्ज होने का दावा किया गया है। 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद अन्य राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों पर मामले दर्ज हुए। अब सरकार ने इन्हें वापस लेने पर सहमति जताई है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

FIR वापसी की कानूनी प्रक्रिया

1. सरकार का नीतिगत फैसला:
सबसे पहले केंद्र या राज्य सरकार कैबिनेट स्तर पर मुकदमे वापस लेने का निर्णय लेती है। इसके बाद संबंधित जिलों के लोक अभियोजकों (सरकारी वकीलों) को अदालत में आवेदन देने के निर्देश जारी किए जाते हैं।

2. अदालत में आवेदन:
BNSS, 2023 की धारा 360 के तहत सरकारी वकील संबंधित अदालत में मुकदमा वापस लेने की औपचारिक अर्जी दाखिल करता है।

3. पीड़ित पक्ष की सुनवाई:
अदालत आवेदन पर फैसला लेने से पहले पीड़ित पक्ष का पक्ष सुनती है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से जुड़े मामलों में संबंधित सरकारी विभाग या अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा सकता है।

4. अदालत का अंतिम फैसला:
यदि अदालत को लगता है कि मुकदमा वापस लेना न्याय और जनहित में है, तो वह आवेदन स्वीकार कर लेती है। इसके बाद ही संबंधित एफआईआर और मुकदमे समाप्त माने जाते हैं।

केस खत्म करने के अन्य कानूनी विकल्प

  • क्लोजर रिपोर्ट: यदि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, तो पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर सकती है।
  • हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: BNSS की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट विशेष परिस्थितियों में एफआईआर रद्द कर सकता है।
  • लोक अदालत: छोटे और समझौता योग्य मामलों का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से भी किया जा सकता है।

किसान आंदोलन में भी अपनाई गई थी यही प्रक्रिया

2020-21 के किसान आंदोलन के बाद भी विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार ने कई मामलों में मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया था। हालांकि, इसके लिए भी अदालत की मंजूरी आवश्यक रही थी। कई राज्यों में आज भी कुछ मामलों की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मुकदमे लंबित हैं।

यानी, जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने के लिए भी सरकार को यही कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केवल घोषणा या राजनीतिक फैसला पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अदालत की मंजूरी के बाद ही मुकदमे औपचारिक रूप से समाप्त माने जाएंगे।

Follow Us on Our Social Media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button