बांकीपुर उपचुनाव में ‘Gen Z’ बनेगा गेमचेंजर? बीजेपी की प्रतिष्ठा और प्रशांत किशोर की साख दांव पर

पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। एक तरफ भाजपा के लिए अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखना चुनौती है, तो दूसरी ओर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के लिए यह अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा मौका माना जा रहा है। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा Gen Z यानी युवा वोटरों की हो रही है।
BJP बनाम प्रशांत किशोर
बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का गढ़ रही है। पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके चलते 30 जुलाई को उपचुनाव हो रहा है। भाजपा इस सीट को हर हाल में बचाना चाहती है, जबकि प्रशांत किशोर इसे अपने राजनीतिक भविष्य की अहम परीक्षा मान रहे हैं।
Gen Z पर सबकी नजर
बांकीपुर में बड़ी संख्या में युवा मतदाता हैं। पटना यूनिवर्सिटी, एनआईटी पटना, बीएन कॉलेज, साइंस कॉलेज और कई बड़े शिक्षण संस्थान इसी क्षेत्र में हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 3.79 लाख मतदाता हैं, जिनमें करीब 1.20 से 1.35 लाख युवा वोटर हैं। यानी हर तीन मतदाताओं में एक युवा है।
छात्र आंदोलन से बदला माहौल
NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बाद शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं। राजनीतिक दल अब युवाओं को साधने की कोशिश में जुटे हैं। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा इस बार चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
विकास बनाम युवाओं के मुद्दे
भाजपा जहां विकास, संगठन और अपने पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे चुनाव लड़ रही है, वहीं प्रशांत किशोर शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर में पारंपरिक वोट बैंक भारी पड़ता है या Gen Z नया चुनावी समीकरण लिखता है।

