झीरम घाटी केस: 10 दोषियों को फांसी की सजा, विजय शर्मा बोले- ‘NIA की जांच बिल्कुल ठीक थी’

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बुधवार को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। करीब 13 साल पुराने मामले में अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा की अवधि को लेकर हुई सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला सुनाया गया।
विजय शर्मा बोले- NIA की जांच सही थी
अदालत के फैसले के बाद उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि NIA ने जांच के आधार पर आरोपियों को दोषी साबित किया और अदालत ने उसी आधार पर फैसला सुनाया।
उन्होंने कहा कि NIA की जांच सही थी, तभी अदालत में दोष सिद्ध हुआ। विजय शर्मा ने कांग्रेस पर इस मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि NIA कोर्ट के फैसले से स्थिति स्पष्ट हो गई है।
भूपेश बघेल की असंतुष्टि पर पलटवार
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से फैसले को लेकर असंतुष्टि जताए जाने पर विजय शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बघेल की नाराजगी का कोई आधार नहीं है।
विजय शर्मा ने बघेल के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने झीरम मामले के सबूत अपनी जेब में होने की बात कही थी। गृहमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि उनके पास सबूत थे तो उन्हें सामने क्यों नहीं लाया गया।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा क्षेत्र में हुआ था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी हथियारबंद माओवादियों ने उस पर हमला कर दिया।
हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और विधायक उदय मुदलियार समेत कई लोगों की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 32 के बीच बताई गई है; हालिया रिपोर्टों में 29 मौतों का भी उल्लेख है।
13 साल चली सुनवाई
जगदलपुर की विशेष NIA अदालत में मामले की सुनवाई करीब 13 वर्षों तक चली। अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। कुल 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला था, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। इसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी रही। 5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 को दोषी करार दिया था।
मृत्युदंड का तत्काल नहीं होगा निष्पादन
अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी सजा का तत्काल निष्पादन नहीं होगा। मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार भी है। इस कारण आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सजा के अमल की स्थिति स्पष्ट होगी।



