भोपाल में किसानों का आंदोलन तेज, सरकार से वार्ता विफल होने के बाद धरना जारी

मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन और तेज हो गया है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के साथ देर रात हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद किसान धरने पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के चलते भोपाल के कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में विभिन्न जिलों से किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरने पर बैठ गए। रास्ते में किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड पार किए, हालांकि पूरे प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति नहीं बनी।
किसानों की प्रमुख मांग ग्रीष्मकालीन मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी, समर्थन मूल्य पर पूरी उपज की खरीद, खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने, भुगतान में देरी समाप्त करने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार तथा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा देने की है। किसानों का कहना है कि सीमित सरकारी खरीदी के कारण उन्हें अपनी उपज खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
राज्य सरकार ने भी केंद्र से मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। सरकार के अनुसार प्रदेश में लगभग 8 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी की आवश्यकता है, जबकि केंद्र ने अब तक 4.54 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य स्वीकृत किया है। अब तक 3.47 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन केवल 82 हजार किसानों से ही खरीदी हो सकी है।
धरनास्थल पर किसान लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ पहुंचे हैं और वहीं भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
पुलिस प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी प्रकार का लाठीचार्ज नहीं किया गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यातायात के वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल आंदोलन समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं।

