Chhattisgarh

बरसे बदरा बेहिसाब… महासमुंद में 48 घंटे की झमाझम बारिश से टूटा 12 साल का रिकॉर्ड

अब 17 साल पुराने रिकॉर्ड पर नजर

महासमुंद। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मानसून ने महासमुंद जिले में ऐसा कहर बरपाया कि महज 48 घंटे की झमाझम बारिश ने 12 साल पुराना वर्षा रिकॉर्ड तोड़ दिया। 1 जून से 30 जुलाई तक जिले में औसत 720 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो वर्ष 2014 में इसी अवधि तक हुई 716.2 मिमी वर्षा से अधिक है। अब मौसम विभाग की नजर वर्ष 2009 के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर है, जब 31 जुलाई तक जिले में 863 मिमी बारिश दर्ज हुई थी।

48 घंटे की बारिश ने बदली तस्वीर

पिछले दो दिनों में जिले के कई इलाकों में 200 मिमी से अधिक बारिश हुई। लगातार हुई इस बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है और कई ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित हुआ। वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से राहत लेकर आई है।

पिथौरा और सरायपाली में सबसे ज्यादा बरसे मेघ

इस बार मानसून का सबसे ज्यादा असर पिथौरा और सरायपाली विकासखंड में देखने को मिला। 30 जुलाई तक पिथौरा में 913.6 मिमी और सरायपाली में 909.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बसना में 773.5 मिमी, महासमुंद में 565.7 मिमी, बागबाहरा में 587.6 मिमी और कोमाखान में 574.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई है। जिले में सामान्य से करीब 49 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

सरायपाली में नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद

सरायपाली विकासखंड अब नया इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच चुका है। यहां वर्ष 2014 में 31 जुलाई तक 934 मिमी बारिश का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। इस बार यह आंकड़ा 909.4 मिमी तक पहुंच चुका है और पुराने रिकॉर्ड से महज करीब 25 मिमी पीछे है। यदि अगले 24 घंटे में अच्छी बारिश होती है तो जुलाई महीने का नया रिकॉर्ड बन सकता है।

पिथौरा में डेढ़ दशक का रिकॉर्ड पहले ही टूटा

पिथौरा में इस साल मानसून सबसे ज्यादा मेहरबान रहा है। यहां अब तक 913.6 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है। वर्ष 2009 का सर्वकालिक रिकॉर्ड 927 मिमी था, यानी अब दोनों आंकड़ों के बीच सिर्फ 13 मिमी का अंतर बचा है। पिछले 16 वर्षों में पिथौरा कभी भी 900 मिमी के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया था, इसलिए वर्ष 2026 पहले ही डेढ़ दशक का सबसे अधिक बारिश वाला साल बन चुका है।

किसानों के लिए सलाह, बारिश अभी जारी रहेगी

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक आर.एल. शर्मा ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों तक जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन खेतों में पानी भर रहा है, वहां समय रहते अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें, ताकि फसलों को नुकसान न हो।

फैक्ट फाइल

2026 – 720 मिमी

2025 – 530 मिमी

2024 – 432 मिमी

2023 – 482 मिमी

2022 – 564 मिमी

2021 – 500 मिमी

2020 – 662 मिमी

2019 – 482 मिमी

2018 – 465 मिमी

2017 – 476 मिमी

2016 – 438 मिमी

2015 – 481 मिमी

2014 – 716.2 मिमी

 

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