भारत का रिफाइंड फ्यूल निर्यात एक साल के उच्चतम स्तर पर, यूरोप और पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी मांग

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत का रिफाइंड फ्यूल निर्यात जुलाई 2026 में पिछले एक वर्ष के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस द्वारा डीजल निर्यात पर रोक और यूरोप में ईंधन की कमी के चलते भारतीय रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर मिला। जुलाई में भारत ने औसतन 15.3 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइंड फ्यूल का निर्यात किया, जो पिछले 12 महीनों के औसत से करीब 27 प्रतिशत अधिक रहा।
वैश्विक संकट से बढ़ा भारतीय निर्यात
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से डीजल आपूर्ति प्रभावित होने और पश्चिम एशिया से निर्यात में बाधा आने के कारण यूरोप सहित कई देशों ने भारत से डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद बढ़ाई। तुर्की जैसे देश, जो पहले रूस से ईंधन आयात करते थे, अब भारतीय कार्गो पर निर्भर हो रहे हैं। जुलाई के दौरान यूरोप को लगभग 40 से 50 लाख बैरल और ब्राजील को करीब 28 लाख बैरल डीजल की आपूर्ति की गई।
रिफाइनरियों की क्षमता और कच्चे तेल की उपलब्धता बनी बड़ी वजह
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान-अमेरिका के बीच कुछ समय के लिए तनाव कम होने से कच्चे तेल की उपलब्धता बेहतर रही, जिससे भारतीय रिफाइनरियां अधिक क्षमता के साथ संचालित हो सकीं। साथ ही प्रमुख निजी रिफाइनरियों में रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद उत्पादन में तेजी आई। भारत के कुल रिफाइंड फ्यूल निर्यात में निजी क्षेत्र की बड़ी रिफाइनरियों की प्रमुख हिस्सेदारी रही, जिससे वैश्विक बाजार में देश की स्थिति और मजबूत हुई।

