रक्षाबंधन पर पंचक-भद्रा का साया! आखिर कब बांधें राखी और कितने दिन तक रखें? जानिए पूरी कहानी

रायपुर-रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन इस बार रक्षाबंधन को लेकर पंचक, भद्रा और चंद्रग्रहण की चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल है कि 28 अगस्त को राखी कब बांधें और राखी बांधने के बाद उसे कितने दिन तक कलाई पर रखना चाहिए? आइए जानते हैं पूरी जानकारी।
राखी बांधने से पहले पंचक-भद्रा का साया, जानिए क्या कहते हैं नियम
इस साल रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। हालांकि, त्योहार से पहले पंचक और भद्रा को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।
बताया जा रहा है कि इस बार पंचक 27 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 1 सितंबर की सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। वहीं 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ भद्रा भी रहेगी, जो रात 9 बजकर 29 मिनट तक बताई गई है। इसी वजह से रक्षाबंधन 27 अगस्त के बजाय 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
28 अगस्त को कब बांधें राखी?
रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 9 बजकर 49 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। बताया जा रहा है कि यह समय भद्रा से मुक्त रहेगा। हालांकि, राखी बांधने का सटीक मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार समय देखना बेहतर होगा।
अब सवाल उठता है कि जब रक्षाबंधन पर पंचक चल रहा है तो क्या राखी बांधना शुभ है?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार पंचक गुरुवार से शुरू हो रहा है और इसे सामान्य पंचक माना जा रहा है। साथ ही रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र रहने की बात कही जा रही है। इसलिए पंचक को लेकर राखी बांधने पर विशेष दोष नहीं माना जा रहा है।
पंचक से घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग जरूर देखें
यानी पंचक का नाम सुनकर रक्षाबंधन को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में पंचक के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करने पर सामान्य तौर पर रोक नहीं मानी जाती। फिर भी किसी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन करने वाले परिवार स्थानीय विद्वान या पंचांग के अनुसार मुहूर्त देख सकते हैं।
राखी बांधने के बाद कितने दिन तक रखें?
राखी बांधने के बाद सबसे ज्यादा सवाल यही होता है कि इसे कब उतारना चाहिए?
दरअसल, राखी को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग-अलग मान्यताएं हैं। कई परिवार इसे सिर्फ त्योहार के दिन बांधकर तुरंत नहीं उतारते, बल्कि कुछ दिनों तक कलाई पर रखते हैं।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार राखी को करीब 15 दिनों तक कलाई पर रखा जाता है। इसके बाद किसी शुभ दिन इसे उतारने की परंपरा है।
वहीं कुछ परिवारों में राखी को जन्माष्टमी तक बांधे रखने की मान्यता है। ऐसे परिवार जन्माष्टमी के दिन राखी उतारते हैं।
इसके अलावा कुछ जगहों पर राखी को दशहरा तक संभालकर रखने की भी परंपरा बताई जाती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति को एक ही दिन राखी उतारनी चाहिए। राखी उतारने का कोई एक सर्वमान्य नियम नहीं है। आपके परिवार और क्षेत्र की परंपरा को प्राथमिकता दी जा सकती है।
राखी उतारने के बाद क्या करें?
राखी उतारने के बाद इसे सीधे कूड़ेदान में फेंकने के बजाय कई परिवार इसे सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा मानते हैं।
कुछ मान्यताओं में राखी को तुलसी के पौधे या किसी पवित्र पेड़ के नीचे रखने की बात कही जाती है। वहीं कुछ लोग इसे बहते पानी में विसर्जित करते हैं।
हालांकि, यहां भी अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार में चली आ रही परंपरा का पालन करना बेहतर माना जाता है।
क्या रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण भी लगेगा?
रक्षाबंधन को लेकर चंद्रग्रहण की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि 28 अगस्त को चंद्रग्रहण होगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसलिए भारत में रक्षाबंधन के दिन ग्रहण को लेकर विशेष चिंता की बात नहीं बताई जा रही है।
हालांकि, धार्मिक नियमों को लेकर अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं, इसलिए जो लोग विशेष धार्मिक नियमों का पालन करते हैं, वे अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
पंचक, भद्रा और ग्रहण की चर्चा के बीच रक्षाबंधन मनाने को लेकर क्या है स्थिति?
कुल मिलाकर इस बार रक्षाबंधन को लेकर तीन बातें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—पंचक, भद्रा और चंद्रग्रहण।
भद्रा 27 अगस्त की रात तक रहने की जानकारी है, इसलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचक जरूर रहेगा, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार इसे लेकर राखी बांधने पर विशेष दोष नहीं माना जा रहा है।
वहीं राखी उतारने की बात करें तो अलग-अलग जगहों पर 15 दिन, जन्माष्टमी या दशहरा तक रखने की परंपरा देखने को मिलती है।
राखी सिर्फ धागा नहीं, रिश्ते का प्रतीक है
रक्षाबंधन का असली महत्व किसी खास धागे या उसे कितने दिन तक कलाई पर रखने से कहीं ज्यादा भाई-बहन के रिश्ते में है। राखी एक ऐसा रक्षा सूत्र है, जो भाई-बहन के बीच प्यार, विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
इसलिए इस रक्षाबंधन पर पंचक और भद्रा को लेकर जानकारी जरूर रखें, अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार शुभ समय चुनें और इस रिश्ते की डोर को पूरे सम्मान के साथ निभाएं।