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Chhattisgarh

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, ऐसे आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड; जानें क्या है ग्लेशियर कॉलैप्स

नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा में 160 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। शुरुआती जांच और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इस तबाही के पीछे ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरने की बात सामने आई है।

सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा। इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे आया। इससे नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव पैदा हुआ, जिसने फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया।

भूकंप या ग्लेशियर टूटना बनी वजह?

26 अगस्त को हुई इस घटना के बाद शुरुआती तौर पर भूकंप को संभावित वजह माना गया था। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार जिस भूकंपीय गतिविधि को भूकंप समझा गया, वह ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों के टूटकर गिरने तथा मलबे के तेज बहाव से पैदा हुई सेसिमिक एनर्जी भी हो सकती है।

नेपाल के भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों ने भी कहा है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी भूकंप ने ग्लेशियर टूटने को ट्रिगर किया था या नहीं। उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों से ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटकर नीचे आने के संकेत जरूर मिले हैं।

क्या होता है ग्लेशियर कॉलैप्स?

ग्लेशियर पहाड़ों पर लंबे समय से जमा बर्फ की विशाल परत होती है, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकती रहती है। तापमान बढ़ने, बर्फ पिघलने, भारी बारिश, चट्टानों के कमजोर होने या भूकंपीय गतिविधि जैसी वजहों से ग्लेशियर का कोई हिस्सा अस्थिर हो सकता है।

जब ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर ऊंचाई से नीचे गिरता है तो वह अपने साथ चट्टान, मिट्टी और मलबा भी बहा ले जाता है। इससे बेहद तेज गति से बर्फ और चट्टानों का विशाल सैलाब बन सकता है। इसी घटना को ग्लेशियर कॉलैप्स या आइस-रॉक एवलॉन्च कहा जाता है।

नेपाल में कैसे बनी तबाही की स्थिति?

नेपाल की घटना में ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा। इसके साथ भारी मात्रा में चट्टान और मलबा भी नीचे आया। इससे नदी में पानी और मलबे का बहाव अचानक बढ़ गया और आसपास के इलाकों में विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हादसे से पहले के 24 घंटों में बड़े पैमाने पर बर्फ पिघलने के संकेत भी सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दिए हैं। निर्माण गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन को भी संभावित कारकों के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना की पूरी वजह स्पष्ट करने के लिए जांच जारी है।

GLOF से कितना अलग है यह हादसा?

नेपाल की घटना को लेकर ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की संभावना पर भी चर्चा हुई है। GLOF में ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है।

हालांकि, शुरुआती सैटेलाइट विश्लेषण में नेपाल की घटना को ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने से पैदा हुआ आइस-रॉक एवलॉन्च माना जा रहा है। इसलिए इसे फिलहाल सीधे GLOF कहना जल्दबाजी होगी।

भारत ने शुरू किया राहत और बचाव में सहयोग

नेपाल में आई आपदा के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्य में सहयोग का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी गई है।

भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। दूतावास नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है।

नेपाल ने भी जारी किए आपातकालीन नंबर

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने सहायता के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234 और हॉटलाइन 1144 जारी की है। पर्यटक पुलिस के लिए 9851289445 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।

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Mahi Rajput

Content Writer (News) – 2.5 Years of Experience- Experienced in writing and editing news articles for digital news portals. - Skilled in writing breaking news, feature stories, and informative web content. - Strong fact-checking, research, and editing skills. - Able to meet daily publishing deadlines and produce high-quality content consistently.Social Media Management – 6 Months of Experience- Managed social media accounts and scheduled content. - Created engaging captions and post copies. - Planned and maintained content calendars. - Monitored audience engagement and responded to queries. - Coordinated with the content team to ensure consistent brand communication.

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