जजों पर आरोपों को लेकर CJI सूर्य कांत का बड़ा बयान, कहा- मीडिया के जरिए नहीं होगा कोई फैसला

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा है कि किसी भी मामले में फैसला स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया में सामने आए आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
जस्टिस संदीप मेहता ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे तीन पत्रों में जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कार्यकाल के दौरान कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और चुनिंदा मामलों की लिस्टिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद CJI सूर्य कांत ने कहा कि संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए और मामले की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगी।
संस्थागत प्रक्रिया के तहत होगा फैसला
CJI सूर्य कांत ने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पद पर बनाए रखने, उनका तबादला करने या उनके खिलाफ किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण द्वारा पूरे मामले पर उचित विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों से संबंधित निजी शिकायतों का निपटारा मीडिया में एक-दूसरे के खिलाफ किए गए दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता। पत्रों में उठाई गई चिंताओं को संज्ञान में लिया गया है, लेकिन उन पर सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम फैसला नहीं दिया जा सकता।
सिर्फ आरोप लगने से दोष साबित नहीं होता
CJI ने कहा कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी जज के खिलाफ निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मामले की जांच उचित स्तर पर की जा रही है और इस दौरान जस्टिस संदीप मेहता की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के साथ-साथ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पक्ष भी ध्यान में रखा जाएगा।
जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट के प्रमुख के तौर पर किसी अन्य हाई कोर्ट से तत्काल मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की थी। उन्होंने जस्टिस शर्मा पर प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत मुकदमेबाजों को लाभ पहुंचाने के लिए केस लिस्टिंग में कथित हेरफेर का आरोप लगाया है।
जजों की नियुक्तियों पर भी चल रहा काम
CJI सूर्य कांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम हाल में हुई कई नियुक्तियों के बाद विभिन्न हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर भी काम कर रहा है। इसी प्रक्रिया के बीच जस्टिस मेहता की ओर से भेजे गए पत्रों में उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया गया है।
उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका से जुड़े गंभीर मामलों में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया जरूरी है। किसी भी जज के खिलाफ कार्रवाई तय प्रक्रिया के तहत उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करने के बाद ही की जाएगी।



