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ChhattisgarhRaipur

नान प्रभारी पर करोड़ों के चावल घोटाले का आरोप, PMO तक पहुंची शिकायत; 5 महीने से जांच रिपोर्ट का इंतजार

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम यानी नान की रायपुर प्रभारी हेलेना तिग्गा पर करोड़ों रुपए के कथित चावल घोटाले के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि रायपुर, कोरबा और कोंडागांव में पदस्थापना के दौरान मिलरों से सांठगांठ कर घटिया और अमानक गुणवत्ता वाले चावल को भी मानक के अनुरूप बताकर नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में जमा कराया गया। इस मामले की शिकायत खाद्य विभाग के अधिकारियों से लेकर खाद्य मंत्री, एसीबी, नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री कार्यालय तक किए जाने की बात सामने आई है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल अब जांच रिपोर्ट को लेकर खड़ा हो रहा है। शिकायत के बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अवर सचिव अमतोष जॉन की ओर से नान के प्रबंध संचालक को मामले का जांच परीक्षण कर 7 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस निर्देश को करीब 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

रायपुर, कोरबा और कोंडागांव में गड़बड़ी का आरोप

शिकायतकर्ताओं भुनेश्वर और विजय ने आरोप लगाया है कि हेलेना तिग्गा ने रायपुर, कोरबा और कोंडागांव में पदस्थ रहने के दौरान राइस मिलरों से सांठगांठ कर सीएमआर यानी कस्टम मिल्ड राइस की गुणवत्ता में कथित गड़बड़ी की।

आरोप है कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान मिलरों से प्राप्त होने वाले चावल में निर्धारित गुणवत्ता का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अमानक चावल के लॉट को भी उच्च गुणवत्ता का बताकर नागरिक आपूर्ति निगम के प्रदाय केंद्रों में जमा कराया गया।

हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

5 महीने से जांच रिपोर्ट का इंतजार

इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 7 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन मांगा था, तो इतने लंबे समय बाद भी रिपोर्ट सामने क्यों नहीं आई?

मामले में जांच की जिम्मेदारी नान के एक एजीएम को दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। जब इस संबंध में एजीएम महेंद्र साहू से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले में बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं और उच्च अधिकारियों से बात करने की बात कही।

विदेश यात्रा और संपत्ति को लेकर भी आरोप

शिकायतकर्ताओं ने नान प्रभारी पर भ्रष्टाचार से प्राप्त कथित कमीशन के पैसों से विदेश यात्रा और संपत्ति बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। शिकायत में अप्रैल महीने में बिना अनुमति दुबई यात्रा करने का भी आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा कर्मचारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, धमकी देने और प्रोटेक्शन मनी मांगने जैसे आरोप भी शिकायत में शामिल किए गए हैं।

हालांकि इन आरोपों पर भी अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

दुर्ग की दो महिला अधिकारियों के आईडी के इस्तेमाल का आरोप

मामले में शिकायतकर्ताओं ने दुर्ग जिले की दो महिला अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि रायपुर जिले में पोस्टिंग नहीं होने के बावजूद इन अधिकारियों की आईडी का इस्तेमाल कर घटिया चावल के लॉट को उच्च गुणवत्ता वाला दिखाने का प्रयास किया गया।

शिकायत में दावा किया गया है कि दोनों अधिकारियों की आईडी से 15-15 लॉट सीएमआर चावल के जमा कराए गए। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की विस्तृत जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

खाद्य विभाग और नान की कार्यप्रणाली पर सवाल

मामले में शिकायत खाद्य सचिव, खाद्य मंत्री, एसीबी और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने की बात कही गई है। इसके बावजूद अगर जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभागीय जांच की प्रक्रिया कहां अटकी हुई है।

सरकारी व्यवस्था में चावल की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही चावल आगे सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS के जरिए लाखों परिवारों तक पहुंचता है। ऐसे में अगर अमानक चावल को मानक बताकर सरकारी गोदामों में जमा कराने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की गुणवत्ता और जवाबदेही से भी जुड़ जाएगा।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभागीय जांच का नतीजा क्या होगा। क्या शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाएंगे? क्या चावल की गुणवत्ता और सीएमआर जमा करने की प्रक्रिया की जांच होगी? और अगर अनियमितता साबित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और मिलरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?

इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल करोड़ों रुपए के कथित चावल घोटाले के आरोप, PMO तक पहुंची शिकायत और 5 महीने से लंबित जांच रिपोर्ट ने नान की कार्यप्रणाली पर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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