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BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता में हुए शिखर सम्मेलन की 20 बड़ी बातें

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, व्यापार, डॉलर के विकल्प और ‘ग्लोबल साउथ’ की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया, जिस पर सभी सदस्य देशों ने सहमति जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। खास बात यह रही कि ब्रिक्स के मंच पर ईरान, UAE और सऊदी अरब जैसे देशों की मौजूदगी के बीच भारत ने कूटनीतिक संतुलन कायम किया। वहीं, भारत-चीन संबंधों और रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई।

1. एक मंच पर ईरान, UAE और सऊदी अरब

भारत ने चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान, UAE और सऊदी अरब को एक ही मंच पर लाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी। भारत ने इन देशों को ब्रिक्स के मंच पर साथ लाकर अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत की।

2. ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर सहमति

ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, व्यापार और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख रखते हुए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया।

3. पश्चिम एशिया संकट पर चिंता

ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई। सदस्य देशों ने अधिकतम संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालने पर जोर दिया।

4. ईरान संकट बड़ी चुनौती

ईरान ब्रिक्स का सदस्य है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच ईरान और UAE दोनों की मौजूदगी ने ब्रिक्स के लिए साझा रुख बनाना चुनौतीपूर्ण बनाया। भारत ने दोनों देशों के नेताओं से बातचीत कर शांति की अपील की।

5. एकतरफा प्रतिबंध और टैरिफ का विरोध

ब्रिक्स घोषणापत्र में एकतरफा व्यापार और गैर-व्यापार प्रतिबंधों तथा आर्थिक दबावों पर आपत्ति जताई गई। सदस्य देशों ने टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों के मुद्दे पर भी अपना विरोध दर्ज कराया।

6. आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश

ब्रिक्स ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया। आतंकी फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाह मिलने पर चिंता जताई गई और आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों के खिलाफ कड़े रुख पर जोर दिया गया।

7. पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र

ब्रिक्स के साझा रुख में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा को प्रमुखता दी गई। भारत ने इस मुद्दे को सम्मेलन में मजबूती से उठाया।

8. मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति, व्यापार और आपसी सहयोग को लेकर बातचीत हुई।

9. भारत-चीन रिश्तों को ‘रीसेट’ करने की कोशिश

2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में मोदी-शी मुलाकात को अहम कदम माना गया।

10. मोदी-पुतिन की बैठक

प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष, रणनीतिक सहयोग और व्यापार सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।

11. ‘कार डिप्लोमेसी’ भी चर्चा में

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की साथ में कार यात्रा ने भी ध्यान खींचा। इसे दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों के राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा गया।

12. ‘ग्लोबल साउथ’ को मजबूत करने पर जोर

भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने को प्राथमिकता दी। ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

13. UNSC सुधार और भारत की दावेदारी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की अपनी मांग दोहराई। वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

14. स्थानीय मुद्राओं में भुगतान को बढ़ावा

ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने और सीमा-पार लेनदेन में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

15. डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

ब्रिक्स के आर्थिक एजेंडे में वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।

16. AI और टेक्नोलॉजी पर फोकस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत उभरती तकनीकों के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को भविष्य के महत्वपूर्ण एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाया गया।

17. ऊर्जा और जलवायु सहयोग

ऊर्जा बदलाव, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों को भी ब्रिक्स के आर्थिक एजेंडे में अहम स्थान दिया गया।

18. डिजिटल खेती और युवाओं पर जोर

MSME, डिजिटल खेती, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और युवाओं के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

19. 2027 में चीन करेगा ब्रिक्स की मेजबानी

भारत के बाद 2027 में चीन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसके साथ संगठन की अगली अध्यक्षता और भविष्य के एजेंडे की दिशा भी तय होगी।

20. भारत के लिए क्यों अहम रहा ब्रिक्स?

2026 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रहा। यहां भारत ने आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, व्यापार संरक्षणवाद और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं सामने रखीं।

समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को देशों का नहीं, बल्कि समाधान का समूह बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को ब्रिक्स से उम्मीदें हैं और यह समाधान का एक इकोसिस्टम है।

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