वायु प्रदूषण और आत्महत्या के जोखिम के बीच संबंध, नई स्टडी में सामने आई चिंताजनक बात

वायु प्रदूषण को अब तक सांस और हृदय से जुड़ी समस्याओं के लिए प्रमुख जोखिम माना जाता रहा है, लेकिन एक नई रिसर्च में इसके मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। अध्ययन में वायु प्रदूषण के संपर्क और आत्महत्या से मौत, आत्महत्या की कोशिश या आत्महत्या के विचारों के बीच संबंध पाया गया है। रिसर्च में खासतौर पर PM2.5, PM10 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) जैसे प्रदूषकों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया।
29 अध्ययनों के नतीजों का किया गया विश्लेषण
रिसर्च टीम ने 29 अलग-अलग अध्ययनों के निष्कर्षों का आकलन किया। इसमें कम समय तक PM2.5 और PM10 के संपर्क के साथ-साथ लंबे समय तक PM2.5 और NO2 के संपर्क और आत्महत्या से जुड़े जोखिमों के बीच संबंध को देखा गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन प्रदूषकों के संपर्क और आत्महत्या से मौत, प्रयास या विचारों के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण सकारात्मक संबंध सामने आया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम से जुड़ी रणनीतियों में पर्यावरणीय जोखिमों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मानसिक स्वास्थ्य पर पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।
प्रदूषण का दिमाग और तनाव पर संभावित असर
अध्ययन में बताया गया कि वायु प्रदूषकों के संपर्क से शरीर में लंबे समय तक सूजन और तंत्रिका तंत्र को नुकसान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका असर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है, जिससे मूड और तनाव से निपटने की क्षमता प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।
रिसर्च में सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे अन्य प्रदूषकों के साथ-साथ शोर और प्रकाश प्रदूषण के संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। लगातार ट्रैफिक और पर्यावरणीय शोर से तनाव बढ़ने तथा शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
शोधकर्ताओं ने बताई अध्ययन की सीमाएं
ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बेन मुलिंस, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे, ने इसे वायु प्रदूषण और आत्महत्या के बीच संबंध की शुरुआती मेटा-एनालिसिस में से एक बताया। हालांकि, उन्होंने अध्ययन के निष्कर्षों की व्याख्या करते समय सावधानी बरतने की बात कही।
मुलिंस के अनुसार, शामिल अध्ययनों में प्रभाव का आकार अपेक्षाकृत छोटा था और कुछ अन्य कारकों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया। उन्होंने मौसम और जलवायु की चरम परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कारक भी आत्महत्या के जोखिम और वायु प्रदूषण दोनों से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए वायु प्रदूषण और आत्महत्या के बीच सीधे कारण-परिणाम संबंध को समझने के लिए आगे और शोध की आवश्यकता है।



