अगस्त में भारत के निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, 43.81 अरब डॉलर पर पहुंचा आंकड़ा

अगस्त 2026 में भारत के वस्तु निर्यात में 26 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया, जबकि अगस्त 2025 में यह 34.74 अरब डॉलर था। निर्यात में इस तेजी के पीछे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पर कम शुल्क और रुपये की कमजोरी को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अमेरिकी बाजार से मिला निर्यात को सहारा
अमेरिका के साथ व्यापारिक परिस्थितियों में बदलाव का असर भारतीय निर्यात पर दिखाई दिया है। पिछले साल भारतीय सामानों पर कुल 50 फीसदी तक शुल्क का सामना करना पड़ रहा था, जबकि अब यह करीब 10 फीसदी रह गया है। इसके चलते अगस्त में अमेरिका को भारत का निर्यात 6.8 अरब डॉलर से बढ़कर 8.3 अरब डॉलर हो गया। यह 21 फीसदी से अधिक की वृद्धि है।
रुपये की कमजोरी से निर्यातकों को फायदा
भारतीय मुद्रा में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट ने भी निर्यातकों को मदद दी है। कमजोर रुपये के कारण भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं, जिससे उनकी मांग बढ़ सकती है। मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिवहन से जुड़े उत्पादों में इस दौरान मजबूत मांग देखने को मिली है। समुद्री उत्पादों और खाद्य पदार्थों का निर्यात भी बेहतर रहा।
कपड़ा और चमड़ा क्षेत्र पर दबाव
कुल निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद श्रम आधारित कुछ क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल-जून तिमाही में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा क्षेत्र के निर्यात में क्रमश: 18.1 फीसदी, 22.6 फीसदी और 6.8 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं कपड़ा निर्यात 12.4 फीसदी और चमड़े के उत्पादों का निर्यात 4.7 फीसदी घटा। चाय के निर्यात में भी 17.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
सोने का आयात घटा, व्यापार घाटा भी कम हुआ
अगस्त में सोने के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अगस्त 2025 में 5.44 अरब डॉलर का सोना आयात हुआ था, जो इस साल घटकर 2.30 अरब डॉलर रह गया। कुल वस्तु आयात 14.05 फीसदी बढ़कर 70.67 अरब डॉलर रहा। निर्यात की तेज वृद्धि और आयात में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा 27.20 अरब डॉलर से घटकर 26.86 अरब डॉलर रह गया।
ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में बढ़त
ऑटोमोबाइल निर्यात में 22.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा रत्न एवं आभूषणों का निर्यात भी 3.14 फीसदी बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया। चीन, सिंगापुर, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और श्रीलंका समेत कई बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ी है। इससे भारतीय निर्यात के बाजार और उत्पाद दोनों के स्तर पर विस्तार के संकेत मिलते हैं।



