42 वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की नियुक्ति रद्द, भाजपा ने भूपेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वर्ष 2022 की सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाए गए कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं। विभागीय जांच में परीक्षा और चयन प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद 26 जून 2022 की परीक्षा और उसके आधार पर जारी चयन प्रक्रिया को निरस्त किया गया है। संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल पद पर वापस भेजने का आदेश दिया गया है।
इस मुद्दे को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कांग्रेस की पिछली भूपेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में प्रतिभावान युवाओं और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
परीक्षा में मिलीं कई अनियमितताएं
डॉ. मिश्रा ने बुधवार को एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि जांच समिति की 3 जुलाई 2026 की रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई स्तरों पर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक चयनित अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब पाए गए। परीक्षा केंद्रों पर उपस्थिति रजिस्टर नहीं होने, समेकित अंक सूची तैयार नहीं किए जाने और उत्तरपुस्तिकाओं पर पहचान छिपाने के लिए कोडिंग व्यवस्था नहीं होने जैसी कमियां भी सामने आईं।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन किया गया और उनके अंकों में बदलाव हुआ। वहीं खरीदी गई, इस्तेमाल की गई और बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या के रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया।
आरक्षण रोस्टर को लेकर भी सवाल
जांच में परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर के अनुसार पदों का वर्गवार निर्धारण नहीं किए जाने की बात सामने आई। विभागीय जांच के अनुसार इससे आरक्षण नियमों के पालन और अभ्यर्थियों को समान अवसर दिए जाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
42 कर्मचारियों को मूल पद पर लौटाया गया
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 2021 और 2022 की सीमित विभागीय परीक्षाओं के जरिए कुल 42 कर्मचारी वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने थे। अब चयन प्रक्रिया रद्द होने के बाद इन सभी को उनके मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस भेजा जा रहा है। विभाग ने संभावित न्यायिक चुनौती को देखते हुए हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर की है।
भाजपा ने लगाए राजनीतिक आरोप
भाजपा प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में नियमों की अनदेखी कर कुछ लोगों को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं के कारण ईमानदारी से परीक्षा देने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित हुए।
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है, इसलिए भाजपा के आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



