Follow Us on Our Social Media
Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा का विस्तार, 91 हजार से ज्यादा घरों में रूफटॉप सोलर; महिलाओं को ‘सोलर दीदी’ बनाने पर जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिए घरों को बिजली उत्पादन से जोड़ने की पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक 91 हजार से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 305 मेगावाट बताई गई है। इसके जरिए घरेलू बिजली खर्च कम करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के सामुदायिक मॉडल और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

केंद्र की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देशभर में घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। जनवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत 23,404 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन और 24,825 घरों को कवर किए जाने की जानकारी दर्ज थी।

बिजली बिल में बचत का दावा

रूफटॉप सोलर लगाने से घरेलू बिजली खर्च में कमी आती है। केंद्र सरकार के अनुसार, देशभर में जुलाई 2026 तक करीब 18.94 लाख परिवारों ने शून्य बिजली बिल की सूचना दी थी। इनमें छत्तीसगढ़ के 16,472 परिवार शामिल थे। हालांकि शून्य बिल की स्थिति उपभोक्ता के बिजली उपयोग और संबंधित बिलिंग अवधि में सौर ऊर्जा उत्पादन पर निर्भर करती है।

राज्य में सोलर सिस्टम के विस्तार को ग्रामीण परिवारों की बिजली लागत कम करने और बचत बढ़ाने से भी जोड़ा जा रहा है।

गांवों में सामुदायिक सोलर मॉडल

छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर के साथ सामुदायिक स्तर पर सौर ऊर्जा के मॉडल पर भी काम किया जा रहा है। धमतरी जिले के थेन्हीं गांव में 142 किलोवाट क्षमता का सामुदायिक सोलर प्लांट स्थापित किए जाने का दावा किया गया है। इससे करीब 71-72 परिवारों को बिजली लाभ मिलने की बात कही गई है।

इस तरह के मॉडल को दूसरे गांवों तक विस्तार देने की योजना ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल के रूप में देखी जा रही है।

महिलाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ रही DWEEPTI योजना

छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026 में DWEEPTI (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion) योजना शुरू की है। इसके तहत महिला स्व-सहायता समूहों को केवल योजना के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में जोड़ने की व्यवस्था की गई है।

योजना के तहत 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघों को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अधिकृत सोलर विक्रेता के रूप में पंजीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है। महिलाओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना और रखरखाव का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

कबीरधाम में तैयार हो रहीं ‘सोलर दीदी’

कबीरधाम जिले में DWEEPTI योजना के शुरुआती मॉडल पर काम शुरू किया गया है। यहां करीब 35 महिलाओं को रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें ‘सोलर दीदी’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। योजना के तहत कबीरधाम के समनापुर गांव में पहला रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी कौशल देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है।

सौर ऊर्जा से आर्थिक बचत और पर्यावरणीय लाभ

रूफटॉप सोलर का विस्तार केवल बिजली बिल में संभावित बचत तक सीमित नहीं है। इससे घरेलू स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ने, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ जैसे ग्रामीण आबादी वाले राज्य में यदि सामुदायिक सोलर मॉडल और महिला-नेतृत्व वाले ऊर्जा उद्यमों का विस्तार होता है, तो इसका असर ऊर्जा लागत के साथ स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने की तैयारी

राज्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के संदर्भ में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक परिवारों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार की ओर से सौर ऊर्जा को आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और महिला रोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले समय में रूफटॉप सोलर, सामुदायिक सौर संयंत्रों और ‘सोलर दीदी’ मॉडल का विस्तार छत्तीसगढ़ की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button