झीरम घाटी फैसले से आदिवासी समाज असंतुष्ट, हाईकोर्ट में चुनौती की तैयारी; हर परिवार से 20 रुपये चंदा जुटाने का फैसला

जगदलपुर। झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद अब सर्व आदिवासी समाज ने भी मामले को लेकर आपत्ति जताई है। 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
इसी बीच जगदलपुर के परपा में सर्व आदिवासी समाज की बैठक हुई, जिसमें बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से समाज के प्रतिनिधि और प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। बैठक में परिजनों ने दावा किया कि जिन 10 लोगों को मामले में दोषी ठहराया गया है, वे झीरम की घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया।
हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की तैयारी
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली बैठकों में ग्रामीणों की मौजूदगी को नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता का आधार नहीं माना जाना चाहिए। उनका दावा है कि आरोपी बनाए गए ग्रामीण ऐसी बैठकों में सामान्य सामाजिक परिस्थितियों के कारण शामिल होते थे और उन्होंने नक्सली गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया।
इन दावों के आधार पर सर्व आदिवासी समाज ने एनआईए कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू करने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखने की भी बात कही गई है।
हर परिवार से 20 रुपये जुटाने का फैसला
कानूनी लड़ाई के खर्च के लिए समाज ने गांव-गांव और परिवारों से सहयोग राशि जुटाने का निर्णय लिया है। इसके तहत हर आदिवासी परिवार से 20 रुपये सहयोग लेने की बात कही गई है। समाज के अनुसार, इस राशि से आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रकाश ठाकुर बोले- फैसला संतोषजनक नहीं
सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के मुताबिक, प्रभावित परिवारों के साथ हुई बैठक में परिजनों ने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्य घटना के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि समाज एनआईए कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है और मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों को निर्दोष मानता है।
ठाकुर के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में सामाजिक बैठकों में शामिल होना अपने आप में नक्सली गतिविधियों में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज अब फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
गंगा नाग ने भी उठाए सवाल
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष गंगा नाग ने भी प्रभावित परिवारों से चर्चा के बाद सजा पाए लोगों को निर्दोष बताए जाने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के पीछे जिन लोगों को समाज वास्तविक जिम्मेदार मानता है, वे अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। हालांकि, यह समाज की ओर से किया गया दावा है और अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए 10 लोगों के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर अदालत ने अपना निर्णय दिया है।
फैसले के बाद कानूनी लड़ाई का नया चरण
झीरम घाटी मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद अब दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में अपील की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके साथ ही सर्व आदिवासी समाज ने भी फैसले को चुनौती देने की तैयारी की है। ऐसे में 13 साल पुराने इस मामले की कानूनी लड़ाई अब हाईकोर्ट के स्तर पर आगे बढ़ने की संभावना है। मृत्युदंड को लागू करने के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है।



