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झीरम का सच जेब में था तो जांच में क्यों नहीं निकला? अरुण साव के बयान पर भूपेश बघेल का पलटवार

रायपुर। झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार किया है। दोनों नेताओं के बीच जुबानी तकरार ऐसे समय में सामने आई है, जब 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है।

झीरम घाटी हमले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर मामले की जांच, बड़ी साजिश और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं से जुड़े सवाल राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

अरुण साव ने भूपेश बघेल पर साधा निशाना

झीरम मामले को लेकर कांग्रेस की बैठक और नेताओं के बयानों पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा। साव ने कहा कि कांग्रेस नेता इस मामले को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

अरुण साव ने भूपेश बघेल के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि बघेल लगातार कहते रहे हैं कि झीरम का सच उनकी जेब में है। साव का सवाल था कि अगर उनके पास मामले से जुड़ा कोई सच या महत्वपूर्ण जानकारी थी, तो वह जांच के दौरान सामने क्यों नहीं आई।

साव ने यह भी कहा कि यदि किसी नेता के पास मामले से संबंधित कोई तथ्य या सबूत है, तो उसे जांच एजेंसी के सामने रखा जाना चाहिए था। उनके बयान के बाद झीरम मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

भूपेश बघेल ने किया पलटवार

अरुण साव के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए झीरम हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौत का जिक्र किया। बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने इस हमले में अपने बड़े नेताओं को खोया है।

बघेल ने साव के परिवार के किसी सदस्य की इस घटना में मौत नहीं होने का हवाला देते हुए कहा कि शायद उन्हें झीरम की घटना का दर्द और उसका एहसास नहीं हो सकता।

भूपेश बघेल इससे पहले भी NIA अदालत के फैसले को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि दोषियों को सजा मिलने के बावजूद झीरम हमले की कथित बड़ी साजिश और मुख्य साजिशकर्ताओं से जुड़े सवाल अभी बाकी हैं।

कवासी लखमा के नाम पर भी चर्चा

झीरम घाटी मामले में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि NIA ने मामले की विस्तार से जांच की है और बड़ी संख्या में लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।

साव के मुताबिक जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए होंगे, उनका उल्लेख जांच एजेंसी की चार्जशीट में किया गया होगा। हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक रिकॉर्ड और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही माना जा सकता है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम हमला

झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। यह हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और गंभीर राजनीतिक हिंसा के मामलों में शामिल रहा है।

मामले की जांच लंबे समय तक चली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

अदालत के फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने फैसले का स्वागत किया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने मामले की कथित बड़ी साजिश और जांच के दायरे को लेकर सवाल उठाए।

बांग्लादेशी नागरिकों की जांच पर भी बोले साव

बिलासपुर में बांग्लादेशी नागरिकों की जांच को लेकर पूछे गए सवाल पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को कुछ लोग संदिग्ध मिले थे, इसलिए उनके संबंध में जांच की जा रही थी।

साव ने कहा कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।

कांग्रेस की अनुशासन समिति पर भी टिप्पणी

कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक को लेकर भी अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी की आंतरिक व्यवस्था और नेताओं के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को लेकर टिप्पणी की।

साव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेताओं को बाहर करने और फिर वापस लेने की प्रक्रिया चलती रहती है। हालांकि ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन पर कांग्रेस की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

झीरम फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

झीरम घाटी मामले में NIA अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा नेता अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से जांच के दायरे और कथित बड़ी साजिश से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।

ऐसे में झीरम घाटी मामला सिर्फ अदालत के फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर भी छत्तीसगढ़ में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बयान इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकते हैं।

 

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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