अमित जोगी की बढ़ीं मुश्किलें! FIR के बाद बार काउंसिल का नोटिस: 7 दिन में मांगा जवाब

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवादित सोशल मीडिया वीडियो के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल की ओर से भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि परिषद ने अमित जोगी से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
इस मामले में अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय ने स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ में शिकायत की थी। इसी शिकायत के आधार पर नोटिस जारी किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, नोटिस की सार्वजनिक प्रति और उसमें दर्ज शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में अब अमित जोगी के जवाब और बार काउंसिल की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
इससे पहले भाजपा नेताओं की शिकायत पर रायपुर के सिविल लाइंस थाने में अमित जोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस उनके घर पहुंचकर पूछताछ के लिए नोटिस भी चस्पा कर चुकी है। इस तरह एक ही विवाद को लेकर उनके सामने पुलिस जांच और बार काउंसिल की शिकायत से जुड़ी दो अलग-अलग प्रक्रियाएं चल रही हैं।
भाजपा नेताओं की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
विवाद की शुरुआत अमित जोगी (Amit Jogi) के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किए गए एक वीडियो से हुई थी। इस वीडियो को लेकर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि वीडियो की सामग्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रति अपमानजनक है।
भाजपा नेताओं ने इस संबंध में रायपुर के सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की। इसमें वीडियो तैयार करने, उसकी सामग्री और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने से संबंधित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो किस संदर्भ में बनाया गया और उसे साझा करने के पीछे क्या उद्देश्य था।
फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अभी अदालत या किसी सक्षम प्राधिकरण की ओर से साबित नहीं किया गया है।
घर पहुंची पुलिस, बाहर चस्पा किया नोटिस
एफआईआर दर्ज होने के बाद सिविल लाइंस पुलिस की टीम अमित जोगी के निवास पर पहुंची थी। वहां पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस चस्पा किया। इसके जरिए उन्हें जांच में शामिल होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया।
पुलिस की यह कार्रवाई आपराधिक प्रकरण की जांच का हिस्सा है। वहीं, स्टेट बार काउंसिल से संबंधित बताया जा रहा नोटिस अधिवक्ता के पेशेवर आचरण को लेकर की गई शिकायत से जुड़ा है।
दोनों प्रक्रियाओं का स्वरूप अलग है। पुलिस जहां एफआईआर में दर्ज आरोपों की जांच कर रही है, वहीं बार काउंसिल शिकायत के आधार पर अमित जोगी से उनका पक्ष मांग रही है। कारण बताओ नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित हो गए हैं।
क्या है ‘ज्ञानू-जानू’ वीडियो विवाद?
अमित जोगी (Amit Jogi) के सोशल मीडिया अकाउंट से हाल ही में एक वीडियो साझा किया गया था। इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्दों और प्रस्तुति पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस तरह की सामग्री संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति अपमानजनक है।
भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी थी।
इसके बाद उन्होंने अपनी सफाई भी दी थी। अमित जोगी ने कहा था कि जिस संदेश को वह देना चाहते थे, उस पर उनका विश्वास अब भी कायम है, लेकिन उसे प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं था। उन्होंने अभिव्यक्ति के तरीके को लेकर खेद भी जताया था।
हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद विवाद थमा नहीं और मामला पुलिस तक पहुंच गया। अब बार काउंसिल में शिकायत के बाद यह प्रकरण एक नए मोड़ पर आ गया है।
सूरत में दिखने के बाद फरार होने की चर्चा
विवाद के बीच अमित जोगी के गुजरात के सूरत में मौजूद होने की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई थीं। इसके बाद उनके रायपुर से बाहर होने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे पुलिस कार्रवाई से जोड़कर उनके फरार होने की बात कही।
हालांकि, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश संगठन महामंत्री निलेश चौहान ने इन चर्चाओं को भ्रामक बताया था। पार्टी की ओर से कहा गया कि अमित जोगी का निजी कार्यक्रम पहले से निर्धारित था और उनके रायपुर से बाहर रहने को पुलिस कार्रवाई से जोड़ना सही नहीं है।
पार्टी ने यह भी दावा किया था कि अमित जोगी संबंधित थाने को अपनी स्थिति से अवगत करा चुके हैं। साथ ही 9 नवंबर को पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने की बात कही गई थी।
अब सात दिन में जवाब देने की चुनौती
बार काउंसिल के कथित नोटिस के बाद अब अमित जोगी के सामने सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने की बात कही जा रही है। उनके जवाब के आधार पर परिषद आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है। शिकायत में उठाए गए मुद्दों और अधिवक्ता के पेशेवर आचरण से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सकती है।
गौरतलब है कि कारण बताओ नोटिस किसी व्यक्ति को आरोपों या शिकायत पर अपना पक्ष रखने का अवसर देता है। केवल नोटिस जारी होने से आरोप साबित नहीं होते और न ही तत्काल किसी दंडात्मक कार्रवाई का निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में दो मोर्चों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ रायपुर पुलिस विवादित वीडियो को लेकर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी, वहीं दूसरी तरफ बार काउंसिल अमित जोगी के जवाब के बाद शिकायत पर विचार करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में उनके जवाब और जांच की दिशा से इस विवाद की अगली तस्वीर साफ होगी।



