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बिलासपुर जिला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान लापरवाही का आरोप

मरीज ने स्टाफ और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

बिलासपुर। जिले के जिला अस्पताल(hospital) की डायलिसिस यूनिट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रतनपुर निवासी एक मरीज ने उपचार के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन से मामले की जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। मरीज का कहना है कि डायलिसिस के दौरान समय पर निगरानी नहीं होने से उसकी जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

पहले भी कई बार लापरवाही होने का लगाया आरोप

पीड़ित द्वारिका प्रसाद मंडलोई पिछले करीब दो महीने से जिला अस्पताल(hospital) में नियमित रूप से डायलिसिस करा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस दौरान कई बार स्टाफ की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत की स्थिति बनी, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि शुक्रवार को हुई घटना ने उनकी चिंता और बढ़ा दी।

‘शरीर की बजाय फर्श पर बहता रहा खून’, पीड़ित का दावा

मरीज के मुताबिक, डायलिसिस की प्रक्रिया शुरू होने के बाद स्टाफ ने उन्हें मशीन से जोड़ दिया, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक उनकी निगरानी नहीं की गई। इसी दौरान उन्हें नींद आ गई। कुछ देर बाद जब उनकी आंख खुली तो उन्होंने देखा कि खून शरीर में वापस जाने के बजाय नीचे फर्श पर बह रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं जाता, तो गंभीर स्थिति बन सकती थी।

चार घंटे की डायलिसिस प्रक्रिया में मॉनिटरिंग पर सवाल

द्वारिका प्रसाद मंडलोई का कहना है कि डायलिसिस की पूरी प्रक्रिया कई घंटों तक चलती है और इस दौरान मरीज की लगातार निगरानी आवश्यक होती है। उनका आरोप है कि यूनिट में मौजूद कर्मचारी नियमित अंतराल पर मरीजों की स्थिति की जांच नहीं करते, जिससे इस तरह की घटनाओं की आशंका बनी रहती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले भी ऐसी परिस्थितियां सामने आ चुकी हैं, लेकिन सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

अस्पताल प्रबंधन से जांच और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद मरीज ने अस्पताल(hospital) प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

डायलिसिस जैसी जीवनरक्षक चिकित्सा प्रक्रिया में मरीज की लगातार निगरानी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लगाए गए आरोपों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल मरीज के आरोपों के आधार पर मामला चर्चा में है। अब यह देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन शिकायत की जांच कर क्या निष्कर्ष निकालता है और यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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