भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करना चाहता बांग्लादेश, हसीना दौर की तल्खी से आगे बढ़ने की कोशिश

बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से मजबूत करना चाहती है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि शेख हसीना के शासनकाल के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में असहजता रही, लेकिन अब ढाका आपसी हितों और फायदे पर आधारित संबंध विकसित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों देशों के बीच सीधे संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
द्विपक्षीय बातचीत पर जोर
हुमायूं कबीर ने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच नए रिश्ते किसी बहुपक्षीय मंच के बजाय सीधे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आगे बढ़ने चाहिए। उन्होंने साझा हितों को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ संतुलित संबंध बनाने की जरूरत बताई।
कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ अपने संबंधों में जरूरत से ज्यादा निर्भरता से बाहर निकलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भी बांग्लादेश के लिए अन्य देशों की तरह एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच अच्छे एवं संतुलित द्विपक्षीय संबंध होने चाहिए।
शेख हसीना को शरण देने से बढ़ा तनाव
अगस्त 2024 में छात्र-युवा आंदोलन के बीच शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद वह भारत आ गई थीं। भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। बांग्लादेश की नई सरकार अब इस दौर की तल्खियों से आगे बढ़कर भारत के साथ नए आधार पर संबंध स्थापित करना चाहती है।
बांग्लादेश की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर चर्चाएं जारी हैं। ढाका का जोर अब साझा हितों, संतुलित संबंधों और सीधे संवाद के जरिए रिश्तों को आगे बढ़ाने पर है।
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी दूरी
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं रही। बांग्लादेश ने पहले कहा था कि उन्हें कार्यक्रम के लिए उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया। भारत की ओर से उन्हें द्विपक्षीय यात्रा और बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन बांग्लादेश ने इनमें से किसी निमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।
अब बांग्लादेश सरकार की ओर से भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की इच्छा जताई गई है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और साझा हितों पर सहयोग से रिश्तों की दिशा तय होने की उम्मीद है।



