बस्तर में अंधविश्वास के खिलाफ तीन दशक से अभियान, संदेश- “कोई नारी टोनही नहीं”

रायपुर/बस्तर। आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में अंधविश्वास, जादू-टोना, टोनही प्रताड़ना और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पिछले तीन दशकों से लगातार जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और अंधविश्वासों से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया।
अभियान के दौरान कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर जिलों के अनेक गांवों में सभाएं, व्याख्यान, स्वास्थ्य शिविर और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। टोनही प्रताड़ना, जादू-टोने के संदेह में हत्या और सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाओं के बाद प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों के भ्रम दूर करने का प्रयास किया गया।
जनजागरण कार्यक्रमों में स्कूली विद्यार्थियों, युवाओं, ग्रामीणों, सुरक्षा बलों के जवानों तथा शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) शिविरों, महाविद्यालयों और स्कूलों में भी विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए।
अभियान के तहत कई मामलों में प्रशासन और स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय कर अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर चर्चा की गई तथा लोगों को तथ्यात्मक और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई गई। विशेष रूप से महिलाओं को टोनही बताकर प्रताड़ित करने की घटनाओं के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और अंधविश्वास के कारण होने वाली हिंसा तथा भेदभाव को रोकना रहा है।
इस जनजागरण अभियान का प्रमुख संदेश रहा है-
“कोई नारी टोनही नहीं होती, अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक सोच अपनाएं।”

