आदिवासी स्कूलों की बदहाली पर अभियान: गढ़चिरौली से आज शुरुआत, आश्रमशालाओं का होगा दौरा

गढचिरौली। महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों में विद्यार्थियों की स्थिति और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान 17 सितंबर से शुरू किया जाएगा। अभियान की शुरुआत गढ़चिरौली जिले से होगी। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके अभियान का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने बुधवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी औपचारिक घोषणा की।
अभियान की घोषणा ऐसे समय की गई है, जब महाराष्ट्र सरकार की ओर से आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 584 छात्रों की मौत की बात स्वीकार किए जाने का मुद्दा चर्चा में है। इसी पृष्ठभूमि में CJP ने आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों की जमीनी स्थिति का जायजा लेने का फैसला लिया है। पार्टी का कहना है कि अभियान के जरिए स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
गढ़चिरौली से महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों तक दौरा
अभियान की शुरुआत गढ़चिरौली जिले से होगी। इसके बाद CJP के प्रतिनिधि महाराष्ट्र के अलग-अलग आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचेंगे। इस दौरान आश्रमशालाओं और एकलव्य स्कूलों का दौरा किया जाएगा। प्रतिनिधि स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, भवनों, हॉस्टल, भोजन, पेयजल, स्वच्छता और शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाएंगे।
अभियान के तहत स्कूलों की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए वहां विद्यार्थियों और संबंधित लोगों से बातचीत भी की जाएगी। पार्टी के मुताबिक इस दौरान सामने आने वाली समस्याओं और कमियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। बाद में इन मुद्दों को सरकार के सामने रखने और सार्वजनिक करने की बात कही गई है।
शिक्षा व्यवस्था और सुविधाओं पर फोकस
CJP के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत को सामने लाना है। पार्टी का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आवासीय स्कूल शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित माहौल की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण, पर्याप्त सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर मिलना जरूरी है। उनके मुताबिक अभियान के दौरान केवल स्कूलों की कमियों को सामने लाने के बजाय विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों को समझने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
584 छात्रों की मौत का मुद्दा
आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 584 छात्रों की मौत का आंकड़ा अभियान की घोषणा के केंद्र में है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से यह आंकड़ा स्वीकार किए जाने के बाद आदिवासी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन मौतों के कारणों का विस्तृत वर्गीकरण सामने नहीं है। अभियान चलाने वाले संगठन ने इसी मुद्दे के साथ स्कूलों की जमीनी स्थिति की पड़ताल करने की बात कही है।
CJP का कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था कैसी है तथा शिक्षा का माहौल कैसा है, इन सभी पहलुओं को देखा जाएगा। अभियान के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई और सरकार के सामने मांग रखने की दिशा तय करने की बात पार्टी ने कही है।
दिपके बोले- सुविधाओं और अवसरों की जरूरत
नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को अपेक्षित गंभीरता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों में प्रतिभा है, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए उचित सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि अभियान का मकसद आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना और सरकार का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। इसके लिए पार्टी के प्रतिनिधि सीधे स्कूलों तक पहुंचेंगे और वहां की स्थिति को समझेंगे।
स्कूलों की समस्याओं की जानकारी जुटाएंगे प्रतिनिधि
अभियान के दौरान CJP के प्रतिनिधि अलग-अलग स्कूलों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। स्कूल भवन और छात्रावास की स्थिति के साथ विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा।
पार्टी के मुताबिक दौरे के दौरान मिली जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जाएगा। स्कूलों में सामने आने वाली समस्याओं और कमियों को सार्वजनिक करने के साथ संबंधित अधिकारियों और सरकार तक भी पहुंचाया जाएगा। अभियान का विस्तार गढ़चिरौली के बाद महाराष्ट्र के अन्य आदिवासी क्षेत्रों तक किए जाने की बात कही गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के पदाधिकारी मौजूद
अभियान की घोषणा के दौरान अभिजीत दिपके के साथ CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और संयुक्त सचिव अक्षय शिंदे भी मौजूद रहे। पार्टी ने कहा कि अभियान के जरिए आदिवासी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
17 सितंबर से गढ़चिरौली में शुरू होने वाले इस अभियान के बाद महाराष्ट्र के अलग-अलग आदिवासी क्षेत्रों में टीमों के दौरे होंगे। आश्रमशालाओं और एकलव्य स्कूलों की व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी जुटाकर विद्यार्थियों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने की योजना है। अभियान के जरिए आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।



