पीएम आवास निर्माण में लेटलतीफी, छत्तीसगढ़ में 14 हजार परिवारों के घर का सपना संकट में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएम आवास) 1.0 के तहत स्वीकृत हजारों मकानों का निर्माण अब भी अधूरा है। राज्य में करीब 14 हजार आवास ऐसे हैं, जिनका काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है।
केंद्र सरकार द्वारा योजना के लिए अनुदान जारी करने की अंतिम समय-सीमा सितंबर 2026 तय किए जाने के बाद राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग की चिंता बढ़ गई है। यदि तय समय तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो हजारों हितग्राहियों का पक्के घर का सपना अधूरा रह सकता है।
जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि उपलब्ध कराती है। प्रदेश में अब तक 2,06,118 आवास स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 1,91,819 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि करीब 14 हजार मकान अब भी अधूरे हैं। इनमें 14 नगर निगमों के 2,671, 55 नगर पालिकाओं के 5,607 और 97 नगर पंचायतों के 5,886 आवास शामिल हैं।
सबसे अधिक चिंता एएचपी (किफायती आवास में साझेदारी) परियोजनाओं (पीएम आवास) को लेकर है। धमतरी, रिसाली, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायपुर और भिलाई में स्वीकृत 1,200 से अधिक आवासों का निर्माण शुरुआती चरण में ही अटका हुआ है। कई जगह केवल नींव और आधारभूत ढांचा तैयार हो पाया है।
राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सितंबर के बाद न तो केंद्रांश मिलेगा और न ही राज्यांश की राशि जारी की जाएगी। ऐसे में यदि निर्माण कार्य अधूरा रहता है तो संबंधित नगरीय निकायों को अपने संसाधनों से शेष काम पूरा करना होगा। साथ ही लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
योजना (पीएम आवास) की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में मुख्य सचिव विकासशील और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर ने समीक्षा बैठकें लेकर सभी निकायों को निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

