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दिल्ली की ड्राफ्ट SIR वोटर लिस्ट में 47.56 लाख नाम बाहर, 30 सितंबर तक कर सकेंगे दावा

नई दिल्ली। दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने मतदाता सूची को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 47,56,722 मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। दिल्ली में कुल 1,45,10,299 पंजीकृत मतदाताओं में से 97,53,577 नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं।

हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्थायी रूप से काट दिया गया है। ऐसे मतदाताओं को 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है। जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में जोड़े जा सकते हैं। अंतिम एसआईआर सूची 4 नवंबर को जारी होने की बात कही गई है।

67.2 फीसदी मतदाताओं का हुआ सत्यापन

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब डेढ़ महीने तक दिल्ली में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। कुल 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 67.2 फीसदी के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा और डिजिटाइज किए गए। इस तरह करीब 97.5 लाख मतदाताओं का रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया में मिल गया।

बाकी 32.8 फीसदी यानी 47.5 लाख से अधिक मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया। इसमें ऐसे मतदाता शामिल हैं जो घर पर नहीं मिले, दूसरी जगह चले गए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जिनकी एक से अधिक प्रविष्टियां हो सकती हैं या अन्य कारणों से सत्यापन पूरा नहीं हो सका।

बड़ी संख्या में मतदाता पते पर नहीं मिले

एसआईआर के दौरान करीब 13 हजार बूथ लेवल अधिकारियों ने दिल्ली के 13 जिलों में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले।

कुछ लोग दिल्ली के भीतर ही दूसरी जगह चले गए हैं, जबकि कुछ दिल्ली से बाहर जा चुके हैं। इसके अलावा मृत मतदाताओं और संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों को लेकर भी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

47 लाख नाम स्थायी रूप से नहीं कटे

ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने वाले मतदाताओं के पास अभी अपना नाम दोबारा शामिल कराने का मौका है। 30 सितंबर तक दावा दाखिल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी संबंधित व्यक्ति के पते और दस्तावेजों का फील्ड वेरिफिकेशन कर सकते हैं।

यदि दावा और दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो संबंधित मतदाता का नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दिल्ली में 47.56 लाख मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए हैं।

अब दावे-आपत्तियों का चरण अहम

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। दिल्ली में यह प्रक्रिया 30 जून से शुरू हुई थी और इसकी समयसीमा कई बार बढ़ाई गई।

अब ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियों का है। जिन पात्र मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें तय समयसीमा के भीतर दावा करना होगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्राफ्ट से बाहर हुए 47.56 लाख नामों में से कितने वास्तव में मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट हैं और कितने पात्र मतदाता सत्यापन के दौरान छूट गए। इसका स्पष्ट जवाब दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही सामने आएगा।

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