40 हजार करोड़ की संपत्ति पर सिंधिया परिवार में विवाद: वसीयत से नोटिस तक, प्रतिमा देवी ने उठाए सवाल

ग्वालियर। सिंधिया राजघराने (Scindia) की करीब 40 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा विवाद एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। ग्वालियर जिला कोर्ट में गुरुवार को इस मामले में अहम सुनवाई होगी। अदालत में प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति और परिवार के बीच पहले से तैयार किए गए समझौते की वैधता को लेकर दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़े दस्तावेज और वसीयत सभी संबंधित उत्तराधिकारियों के सामने रखे गए थे या नहीं। प्रतिमा देवी ने दावा किया है कि उन्हें वसीयत की जानकारी नहीं दी गई और जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से उनकी आपत्ति को लेकर जवाब पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है।
प्रतिमा देवी ने उठाए दस्तावेजों पर सवाल
पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ अदालत पहुंची थीं। उन्होंने अपनी आपत्ति में कहा था कि उन्हें न तो वसीयत की पूरी जानकारी दी गई और न ही संपत्ति से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे सिंधिया भी संबंधित संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों को नजरअंदाज करके संपत्ति के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
उनकी ओर से अदालत में इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। अब गुरुवार को होने वाली सुनवाई में इस आपत्ति के कानूनी आधार और पहले हुए समझौते पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।
नेपाल के गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप
प्रतिमा देवी ने नोटिस की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें नेपाल के गलत पते पर नोटिस भेजे गए। उनका कहना है कि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं।
इसी आधार पर उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि नोटिस सही पते पर नहीं पहुंचा तो उन्हें मामले की कार्यवाही में प्रभावी तरीके से शामिल होने का अवसर कैसे मिला। उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर किए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
यह बिंदु भी गुरुवार की सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि संपत्ति विवाद में सभी संबंधित पक्षों को उचित सूचना और सुनवाई का अवसर मिला या नहीं, यह कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
दूसरे पक्ष ने आपत्ति पर दिया जवाब
प्रतिमा देवी की आपत्ति के जवाब में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे (Scindia) की ओर से अदालत में जवाब पेश किया जा चुका है।
दूसरे पक्ष की ओर से कहा गया है कि संपत्ति के बंटवारे को लेकर समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ते समय प्रतिमा देवी की सहमति रही थी। ऐसे में समझौते की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बाद आपत्ति उठाने के औचित्य पर सवाल खड़े किए गए हैं।
यानी एक ओर प्रतिमा देवी का पक्ष यह कह रहा है कि उन्हें जरूरी दस्तावेज और वसीयत की जानकारी नहीं दी गई तथा उनके अधिकारों की अनदेखी हुई। दूसरी ओर दूसरे पक्ष का कहना है कि प्रक्रिया के दौरान उनकी सहमति मौजूद थी और अब अंतिम चरण में आपत्ति उठाई जा रही है।
आज की सुनवाई क्यों अहम
गुरुवार की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अदालत के सामने अब दोनों पक्षों की दलीलें होंगी। सुनवाई में प्रतिमा देवी की आपत्ति, नोटिस की प्रक्रिया, वसीयत और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ पहले से तैयार समझौते की वैधता पर चर्चा हो सकती है।
अदालत की आगे की कार्यवाही इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपने दावों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और कानूनी तर्क रखते हैं। हालांकि, गुरुवार की सुनवाई में अंतिम रूप से पूरे संपत्ति विवाद का फैसला होना जरूरी नहीं है। अदालत मामले से जुड़े पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
लंबे समय से चर्चा में है संपत्ति विवाद
सिंधिया राजघराने (Scindia) की संपत्ति का मामला लंबे समय से कानूनी और सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपए बताई जाती है। इतनी बड़ी संपत्ति से जुड़े उत्तराधिकार और बंटवारे के सवालों के कारण परिवार के सदस्यों के बीच कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल सभी की नजर गुरुवार को ग्वालियर जिला कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। प्रतिमा देवी की आपत्ति और दूसरे पक्ष के जवाब के बाद अदालत में होने वाली बहस से यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति के बंटवारे को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।



