स्टिंग से हटेगा ‘एनर्जी ड्रिंक’ टैग, FSSAI के नए नियमों के बाद पेप्सिको ने बदला लेबल

पेप्सिको इंडिया ने अपने लोकप्रिय पेय ब्रांड स्टिंग की नई कैन और बोतलों से ‘एनर्जी’ शब्द हटाने का फैसला किया है। कंपनी ने यह बदलाव भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की नई गाइडलाइन लागू होने से पहले किया है। नए नियमों के तहत अब ‘एनर्जी ड्रिंक’ को अलग श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी, जिसके चलते कंपनियों को अपने उत्पादों की लेबलिंग में बदलाव करना पड़ रहा है।
FSSAI के नियमों के अनुरूप बदला लेबल
जानकारी के अनुसार, स्टिंग के सभी नए पैकेजिंग संस्करण बिना ‘एनर्जी’ शब्द के बाजार में उतारे जाएंगे। कंपनी अपने विज्ञापनों और ब्रांडिंग में भी आवश्यक बदलाव कर रही है। फॉर्मूला वन के साथ जुड़ी प्रचार सामग्री को भी नए नियमों के अनुरूप संशोधित किया जा रहा है।
हालांकि, इस श्रेणी की अन्य कंपनियों ने नियमों को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की है। उद्योग संगठनों का कहना है कि पहले से तैयार पैकेजिंग और स्टॉक में बदलाव करने से कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी कारण कई कंपनियों ने FSSAI से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।
13 हजार करोड़ के बाजार पर असर की आशंका
भारत में एनर्जी ड्रिंक बाजार का आकार 13,000 करोड़ रुपये से अधिक आंका जाता है। इस क्षेत्र में हर साल कंपनियां हजारों करोड़ रुपये विज्ञापन और मार्केटिंग पर खर्च करती हैं। स्टिंग ने कम कीमत वाले विकल्प के जरिए इस बाजार में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है और इसे प्रमुख ब्रांडों में शामिल किया जाता है।
FSSAI का मानना है कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं, इसलिए लेबलिंग में बदलाव जरूरी है। वहीं, इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने नियामक से इस फैसले पर पुनर्विचार और उद्योग से विस्तृत चर्चा के बाद नियम लागू करने की मांग की है। दूसरी ओर, पेप्सिको ने स्पष्ट किया है कि वह सभी लागू नियमों का पालन करते हुए अपने उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग में आवश्यक बदलाव कर रही है।

