
रायपुर। राजधानी रायपुर के श्री जगन्नाथ(Jagannath) मंदिर, गायत्री नगर में भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य रथयात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 16 जुलाई को निकलने वाली इस धार्मिक यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा तीनों दिव्य रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इससे पहले 14 जुलाई को मंदिर परिसर में नेत्रोत्सव का आयोजन किया जाएगा। रथयात्रा को लेकर मंदिर समिति की ओर से सभी धार्मिक अनुष्ठानों और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है।
तीनों दिव्य रथों का हुआ आकर्षक श्रृंगार
श्री जगन्नाथ(Jagannath) मंदिर सेवा समिति के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के लिए तैयार किए गए तीनों रथों को आकर्षक रूप से सजाया गया है। रथयात्रा को भक्त और भगवान के सीधे मिलन का पर्व माना जाता है, क्योंकि इसी अवसर पर भगवान मंदिर से बाहर निकलकर अपने श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक परंपराओं और आपसी जुड़ाव का भी प्रतीक माना जाता है।
जगन्नाथ(Jagannath) रथयात्रा के दिन सुबह मंदिर में वैदिक परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और हवन का आयोजन होगा। भगवान का चंदन, केसर, कस्तूरी और कपूर सहित सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान को पारंपरिक गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और धार्मिक ध्वनियों के बीच भगवान अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे छेरा पहरा की परंपरा
रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्राचीन परंपरा ‘छेरा पहरा’ का भी आयोजन किया जाएगा। इस परंपरा के तहत राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के सामने सोने की झाड़ू से सेवा करेंगे। यह परंपरा समानता, विनम्रता और सेवा भाव का संदेश देती है। आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और सामाजिक-धार्मिक संगठनों के लोग शामिल होंगे।
रथयात्रा के दौरान मंदिर परिसर और शहर में भक्ति का माहौल देखने को मिलेगा। महिला मंडलों की ओर से भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य आयोजित किए जाएंगे। ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है।
24 जुलाई को होगी बाहुड़ा यात्रा
श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने बताया कि रथयात्रा के बाद 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा आयोजित होगी। इस दिन भगवान अपने रथों के माध्यम से वापस मंदिर लौटेंगे। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार के साथ इस धार्मिक आयोजन में शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें और सनातन परंपरा के इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनें।

