बरेली में फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 50 हजार रुपये में मिलती थी BA की मार्कशीट

उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार कर लोगों को देने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रदीप कुमार गंगवार के रूप में हुई है, जो बारादरी थाना क्षेत्र के आशापुरम स्थित आनंद विहार का निवासी है। पुलिस ने उसके पास से अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों की 21 मार्कशीट, छह प्रमाणपत्र और 11 मोहरें बरामद की हैं। इसके अलावा दो मोबाइल फोन, एक इंकपैड, 8,970 रुपये नकद और एक स्कूटी भी जब्त की गई है।
50 हजार रुपये लेकर बनवाता था तीन साल की मार्कशीट
पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा पंजाब के संगरूर निवासी राहुल सिंह की शिकायत के बाद हुआ। राहुल ने 21 अक्टूबर को ई-मेल के जरिए पुलिस से शिकायत की थी। उसका आरोप था कि प्रदीप ने बीए में प्रवेश दिलाने के नाम पर उससे 50 हजार रुपये लिए थे। करीब छह महीने बाद आरोपी ने उसे बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की मार्कशीट दे दीं।
राहुल को शुरुआत में दस्तावेजों पर संदेह नहीं हुआ, लेकिन सत्यापन कराने पर मार्कशीट फर्जी निकलीं। आरोप है कि रुपये वापस मांगने पर प्रदीप ने उसका मोबाइल नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद राहुल ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर जांच करते हुए आरोपी को वंश अस्पताल के पीछे रेलवे ग्राउंड के पास से गिरफ्तार कर लिया।
कई विश्वविद्यालयों के नाम वाली मार्कशीट बरामद
पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, महाराजा अग्रसेन गढ़वालियन विश्वविद्यालय, नॉर्थ ईस्ट क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी और नगालैंड यूनिवर्सिटी के नाम वाली मार्कशीट मिली हैं। इसके अलावा महर्षि दयानंद वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की नौ मार्कशीट और छह प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह डेस्टिनी नाम से एजुकेशन सेंटर चलाता था। उसके संपर्क में ऐसे लोग थे, जो पुराने वर्षों की स्नातक और परास्नातक की मार्कशीट बनवाना चाहते थे।
नोएडा निवासी सहयोगी की तलाश में पुलिस
जांच में नोएडा निवासी रामचरण का नाम भी सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि वह इस कथित नेटवर्क में शामिल हो सकता है। फिलहाल उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस बरामद दस्तावेजों और मोहरों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोगों को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र दिए गए और उनका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। एसपी सिटी चिराग जैन के मुताबिक, मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।



