देश में इथेनॉल की बढ़ती अतिरिक्त क्षमता से बढ़ी चिंता, नए बाजारों की तलाश में सरकार और उद्योग

भारत में इथेनॉल उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ने के कारण अब इसकी अतिरिक्त आपूर्ति को खपाने की चुनौती सामने आ रही है। देश में इथेनॉल की स्थापित उत्पादन क्षमता करीब 20 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि मौजूदा मांग इससे काफी कम है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक करीब 7 अरब लीटर यानी 700 करोड़ लीटर इथेनॉल के लिए फिलहाल स्पष्ट बाजार उपलब्ध नहीं है।
इथेनॉल की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर
देश में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 के लिए सालाना करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है। इसके अलावा शराब, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन जैसे गैर-ईंधन क्षेत्रों में करीब 3 से 3.5 अरब लीटर इथेनॉल की खपत होती है। इस हिसाब से उत्पादन क्षमता और मौजूदा मांग के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
इथेनॉल उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार कई डिस्टिलरी अपनी कुल क्षमता के करीब 60 प्रतिशत पर ही काम कर रही हैं। आने वाले वर्षों में भी क्षमता उपयोग 65 से 75 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र में ही करीब 2.77 अरब लीटर अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति बनने का अनुमान जताया गया है।
E20 के बाद आगे की रणनीति पर मंथन
सरकार फिलहाल E20 मिश्रण व्यवस्था पर ही आगे बढ़ रही है। E25 या E30 जैसे ज्यादा मिश्रण वाले ईंधन को अनिवार्य करने की योजना पर फिलहाल आगे नहीं बढ़ा जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि E20 कार्यक्रम के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने के लिए 2027 तक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
इथेनॉल की अतिरिक्त उपलब्धता को देखते हुए उद्योग जगत अलग-अलग वाहनों के लिए अलग-अलग मिश्रण वाले ईंधन और कीमतों की व्यवस्था पर भी चर्चा कर रहा है। इसके तहत E10, E20 और E85 जैसे विकल्पों को वाहन की तकनीक और अनुकूलता के आधार पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।
नेपाल समेत नए बाजारों की तलाश
अतिरिक्त इथेनॉल की खपत के लिए दूसरे देशों में बाजार तलाशने की कोशिश भी जारी है। फिलहाल पहली पीढ़ी के इथेनॉल के निर्यात पर प्रतिबंध है, जबकि दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल के निर्यात को अनुमति दी गई है। कुछ मात्रा में गैर-ईंधन इथेनॉल अफ्रीकी देशों को भेजा जा रहा है। वहीं, नेपाल के साथ भी इथेनॉल आपूर्ति को लेकर बातचीत चल रही है। नेपाल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण को अनिवार्य करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
डीजल में इथेनॉल मिश्रण की संभावना
इथेनॉल की अतिरिक्त क्षमता को इस्तेमाल करने के लिए डीजल में भी जैव ईंधन मिलाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोल की तुलना में डीजल की मांग अधिक होने के कारण इसमें जैव-आइसोब्यूटेनॉल जैसे ईंधन की थोड़ी मात्रा मिलाने से नए बाजार का रास्ता खुल सकता है।
उद्योग जगत का अनुमान है कि डीजल में केवल 2 प्रतिशत जैव-आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर नई परियोजनाओं की मांग पैदा कर सकती है। इसके साथ ही शराब, फार्मास्यूटिकल्स और प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाले अनडिनैचर्ड इथेनॉल की मांग भी बनी हुई है।



