टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के बाद फिर चर्चा में मुंबई अंडरवर्ल्ड, जानिए 10 कुख्यात शूटरों की कहानी

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले के बाद मुंबई अंडरवर्ल्ड एक बार फिर चर्चा में है। इस घटना में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा सामने आया है। वहीं, मुंबई के अपराध जगत के पुराने दौर में माया डोलस, मान्या सुर्वे और सुभाष सिंह ठाकुर जैसे नाम सुर्खियों में रहे हैं। 1980 और 1990 के दशक में गैंगवार, वसूली और गोलीबारी की घटनाओं ने मुंबई में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में क्या हुआ?
18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की घटना सामने आई। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने अभिनेता की कार को निशाना बनाया। इस दौरान टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज की और तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसियां आरोपियों के कथित गैंग कनेक्शन, हमले की साजिश और अन्य संभावित मददगारों की भूमिका की जांच कर रही हैं। इस घटना ने मुंबई अंडरवर्ल्ड के पुराने दौर और मौजूदा आपराधिक नेटवर्क के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।
मुंबई अंडरवर्ल्ड के 10 चर्चित शूटर
1. अमीरजादा खान: मुंबई के पुराने पठान गिरोह से जुड़े अमीरजादा खान का नाम दाऊद इब्राहिम के भाई शब्बीर कासकर की हत्या के मामले में सामने आया था। 1983 में मुंबई सेशन कोर्ट के बाहर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
2. सादिक कालिया: सादिक जलावार उर्फ सादिक कालिया को छोटा शकील के गिरोह से जुड़ा शूटर बताया जाता था। उसका नाम 1990 के दशक में छोटा राजन के गिरोह के खिलाफ हुई कई आपराधिक वारदातों में सामने आया। दिसंबर 1997 में मुंबई में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हो गई।
3. बग्गा रेड्डी: वेंकटेश बग्गा रेड्डी उर्फ बाबा रेड्डी छोटा राजन के गिरोह से जुड़ा था। उसका नाम अवैध हथियारों की सप्लाई और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। मई 2008 में हैदराबाद में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हो गई।
4. बंटी पांडे: प्रकाश नारायण पांडे उर्फ बंटी पांडे का नाम हत्या, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर मामलों में सामने आया। वह पहले छोटा राजन के गिरोह से जुड़ा था। बाद में उसके अलग नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। उसके खिलाफ दर्ज मामलों में आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
5. संतोष पांगारकर: संतोष पांगारकर का नाम कारोबारी सुनीत खटाऊ की हत्या के मामले में सामने आया था। मई 1994 में महालक्ष्मी इलाके के पास खटाऊ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पांगारकर को गिरफ्तार किया था।
6. फिरोज कोकणी: फिरोज अब्दुल्ला सरगुरोह उर्फ फिरोज कोकणी मुंबई के डोंगरी इलाके से जुड़ा अपराधी था। उसका नाम दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से संबंधित पुलिस जांचों में सामने आया। 1994 में भाजपा विधायक रामदास नायक की हत्या के मामले में भी उस पर आरोप लगाए गए थे।
7. मान्या सुर्वे: मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे था। वह 1970 के दशक के अंतिम वर्षों और 1980 के शुरुआती दौर में मुंबई के अपराध जगत में सक्रिय था। 11 जनवरी 1982 को वडाला में पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस घटना को मुंबई के शुरुआती चर्चित एनकाउंटरों में गिना जाता है।
8. सुभाष सिंह ठाकुर: सुभाष सिंह ठाकुर का नाम 1992 के जेजे अस्पताल गोलीकांड में सामने आया था। यह घटना दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली से जुड़े गिरोहों के बीच दुश्मनी के दौर में हुई थी। इस मामले में ठाकुर को दोषी ठहराया गया था।
9. दिलीप बुवा: दिलीप बुवा मुंबई के पुराने अंडरवर्ल्ड से जुड़ा एक चर्चित नाम था। वह अशोक जोशी के गिरोह से जुड़ा रहा और बाद में उसकी गतिविधियां दूसरे आपराधिक नेटवर्क से भी जुड़ीं। लोखंडवाला एनकाउंटर के दौरान उसकी मौत हो गई।
10. माया डोलस: माया डोलस मुंबई अंडरवर्ल्ड के सबसे चर्चित नामों में शामिल रहा। उसने अशोक जोशी के गिरोह से अपने आपराधिक करियर की शुरुआत की और बाद में दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जुड़ा। नवंबर 1991 में लोखंडवाला इलाके में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने मुंबई पुलिस और अंडरवर्ल्ड के संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
पुराने अंडरवर्ल्ड से कितना बदल गया अपराध का तरीका?
मुंबई अंडरवर्ल्ड के पुराने दौर में स्थानीय गिरोहों, उनके इलाकों और आपसी दुश्मनी की अहम भूमिका होती थी। समय के साथ अपराध के तरीकों में बदलाव आया है। हाल के मामलों में दूसरे राज्यों के युवकों को कथित तौर पर वारदातों के लिए भर्ती करने और सोशल मीडिया के जरिए संपर्क स्थापित करने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में भी पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को किसने निर्देश दिए, हमले की योजना कैसे बनाई गई और कथित गैंग कनेक्शन की वास्तविक भूमिका क्या थी। जांच पूरी होने और अदालत में तथ्य सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



