Follow Us on Our Social Media
ChhattisgarhRaipur

अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कोविड के कारण TET नहीं होने का खामियाजा अभ्यर्थी नहीं भुगतेगा

रायपुर-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित नहीं हो सकी या रद्द हो गई, तो केवल इसी आधार पर किसी अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब देरी उम्मीदवार की गलती नहीं बल्कि प्रशासनिक परिस्थितियों के कारण हुई हो, तो उसका नुकसान अभ्यर्थी को नहीं उठाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ा है, जिसके पिता सहायक शिक्षक (एलबी) के पद पर कार्यरत थे। 7 अप्रैल 2017 को उनके निधन के बाद परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इस बीच याचिकाकर्ता ने वर्ष 2019 में डीएलएड (D.El.Ed.) की योग्यता हासिल कर ली और 22 मार्च 2020 को प्रस्तावित टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन भी किया।

हालांकि, कोविड-19 महामारी के चलते यह परीक्षा रद्द हो गई। बाद में 9 जनवरी 2022 को आयोजित टीईटी परीक्षा में अभ्यर्थी सफल भी हो गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने यह कहते हुए उसका दावा खारिज कर दिया कि उसने निर्धारित तीन वर्ष की अवधि के भीतर आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं की।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि 2017 से मार्च 2020 के बीच टीईटी परीक्षा आयोजित हुई थी। ऐसे में अभ्यर्थी के पास समय पर परीक्षा देने का अवसर ही उपलब्ध नहीं था।

कोर्ट ने कहा कि यदि परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई, तो अभ्यर्थी को निर्धारित समय सीमा पूरी न करने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कोविड-19 महामारी के दौरान 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 तक की अवधि को कानूनी समय-सीमा (Limitation Period) की गणना से बाहर रखने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने माना कि यही सिद्धांत इस मामले पर भी लागू होता है। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2022 को जारी आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करें।

क्या होती है अनुकंपा नियुक्ति?

अनुकंपा नियुक्ति ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को आर्थिक संकट से उबारने के उद्देश्य से सरकारी नौकरी दी जाती है। इसका उद्देश्य नियमित भर्ती करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देना होता है।

फैसले का क्या होगा असर?

हाईकोर्ट के इस फैसले को उन अभ्यर्थियों के लिए राहत माना जा रहा है, जिनकी अनुकंपा नियुक्ति कोविड-19 के दौरान टीईटी परीक्षा नहीं होने या समय पर योग्यता पूरी न कर पाने के कारण अटक गई थी। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासनिक कारणों से हुई देरी का खामियाजा किसी पात्र अभ्यर्थी को नहीं भुगतना चाहिए।

 

Follow Us on Our Social Media

Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button