धनतेरस पर नई गाड़ी खरीदें तो जरूर करें पूजा, जानें स्वास्तिक बनाने से लेकर नारियल फोड़ने तक की विधि

दिल्ली। धनतेरस (Dhanteras) पर सोना-चांदी, बर्तन और वाहन खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन बाजारों में नई गाड़ी खरीदने वालों की भीड़ रहती है। कई लोग धनतेरस के दिन ही अपनी नई कार, बाइक या स्कूटर घर लाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई नई वस्तु घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती है। अगर आप भी 6 नवंबर को धनतेरस के मौके पर नया वाहन खरीद रहे हैं, तो उसकी पूजा करना न भूलें।
मान्यता के अनुसार, नया वाहन खरीदने के बाद शोरूम में ही उसकी पूजा की जा सकती है। इसके लिए किसी विशेष आयोजन की जरूरत नहीं होती। लाल चंदन, अक्षत, मौली, फूल, दीपक और नारियल जैसी सामान्य पूजन सामग्री से वाहन की पूजा की जा सकती है। धार्मिक परंपरा में वाहन पूजा का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित और मंगलमय बनाने की कामना करना है।
नई गाड़ी की पूजा कैसे करें?
धनतेरस (Dhanteras) पर वाहन खरीदने के बाद सबसे पहले गाड़ी को साफ कर लें। इसके बाद पूजा की सामग्री लेकर विधि-विधान से पूजा करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वाहन पूजा के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं।
1. वाहन पर स्वास्तिक बनाएं: सबसे पहले लाल चंदन या रोली से गाड़ी के आगे के हिस्से पर स्वास्तिक बनाएं। स्वास्तिक को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद उस पर अक्षत यानी साबुत चावल चढ़ाएं।
2. मौली बांधें: स्वास्तिक बनाने के बाद उस पर लाल मौली या कलावा बांधें। कुछ लोग वाहन के शीशे या हैंडल पर भी कलावा बांधते हैं। इसे शुभ और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
3. फूल और अक्षत चढ़ाएं: वाहन पर फूल चढ़ाएं और भगवान गणेश, माता लक्ष्मी तथा भगवान धन्वंतरि का स्मरण करें। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ काम की शुरुआत में उनकी पूजा की जाती है।
4. आरती उतारें: दीपक या कपूर जलाकर नई गाड़ी की आरती करें। इस दौरान परिवार के सदस्य भी पूजा में शामिल हो सकते हैं। वाहन के सुरक्षित संचालन और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
5. नारियल फोड़कर पूजा पूरी करें: पूजा के अंत में नारियल फोड़ने की परंपरा है। इसके बाद वाहन पर कलावा बांधकर पूजा पूरी करें। नारियल फोड़ते समय आसपास लोगों और वाहन को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखें।
वाहन खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो शुभ समय का भी ध्यान रख सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लाभ, अमृत और अभिजीत मुहूर्त में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। 6 नवंबर 2026 के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं।
- लाभ चौघड़िया: सुबह 7:54 बजे से 9:17 बजे तक।
- अमृत चौघड़िया: सुबह 9:16 बजे से 10:38 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12:45 बजे तक।
- चर मुहूर्त: दोपहर 4:11 बजे से शाम 5:33 बजे तक।
- शाम का शुभ मुहूर्त: शाम 6:03 बजे से 7:19 बजे तक।
- रात्रिकालीन लाभ मुहूर्त: रात 8:49 बजे से 10:27 बजे तक।
धनतेरस (Dhanteras) पर खरीदारी के लिए प्रदोष काल का भी विशेष महत्व माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, पूजा का समय शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग पंचांगों में मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
वाहन में लोहे का इस्तेमाल, इसलिए शनि देव का स्मरण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वाहन में लोहे का इस्तेमाल होता है और लोहा शनि देव से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से नई गाड़ी खरीदने के बाद शनि देव का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शनि देव के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
शनि देव का स्मरण करते हुए उनसे वाहन यात्रा में सुरक्षा और बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। हालांकि, वाहन पूजा के लिए किसी एक मंत्र का जाप अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार भगवान का नाम लेकर पूजा कर सकते हैं।
धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?
धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना की जाती है।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा भी की जाती है। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी तथा कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और दूसरी उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं।
घर के बाहर जलाएं यम दीपक
धनतेरस पर यम दीपदान की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है। इसे यमराज के निमित्त दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
धनतेरस का पर्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह धन, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना का अवसर भी है। नई गाड़ी खरीदते समय उसकी पूजा के साथ यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग का संकल्प लेना भी जरूरी है। हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा का ध्यान रखना ही यात्रा को सुरक्षित बनाने का सबसे जरूरी तरीका है।



