48 साल बाद खुली पुरी मंदिर के रत्न भंडार की पड़ताल, पुरानी सूची से मिल रहा खजाने का ब्यौरा

पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे आभूषणों और कीमती सामान की इन्वेंट्री का काम जारी है। सालाना रथ यात्रा के बाद दोबारा शुरू हुई इस प्रक्रिया में अब तक सामने आया है कि भंडार में मौजूद कई कीमती वस्तुएं वर्ष 1978 में तैयार की गई सूची से काफी हद तक मेल खा रही हैं। मंदिर प्रशासन करीब 48 साल के अंतराल के बाद रत्न भंडार की विस्तृत इन्वेंट्री करा रहा है।
सुरक्षा और निगरानी के बीच चल रहा काम
इन्वेंट्री की पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार से मंजूर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत की जा रही है। रत्न भंडार में प्रवेश करने वाले अधिकृत लोगों की अंदर जाने से पहले और बाहर आने के बाद सुरक्षा जांच की जा रही है। पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी में हो रही है और मजिस्ट्रेट समेत अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।
मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी के अनुसार, सोमवार को सुबह करीब 11:30 बजे रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में प्रवेश किया गया और शाम 6:55 बजे तक इन्वेंट्री का काम चला। 25 मार्च से शुरू हुई इस प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है।
तीन बड़े बक्सों के लिए अलग व्यवस्था
रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में रखे तीन बक्सों की भी इन्वेंट्री की जानी है। आकार बड़ा होने के कारण इन बक्सों की गिनती और जांच भीतरी कक्ष में संभव नहीं हो सकी। इसके लिए प्रशासन राज्य सरकार से अतिरिक्त SOP की मंजूरी लेने की तैयारी कर रहा है। योजना के मुताबिक इन बक्सों की इन्वेंट्री खजाने के पास स्थित बड़े कमरे में की जाएगी।
तकनीक की मदद से तैयार हो रहा डिजिटल रिकॉर्ड
रत्न भंडार में मौजूद कीमती वस्तुओं का डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। इसके लिए हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के साथ एडवांस्ड 3D मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य इन्वेंट्री को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।
1978 में हुई पिछली इन्वेंट्री को पूरा करने में 72 दिन लगे थे। इस बार प्रशासन प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय सटीकता पर जोर दे रहा है। आभूषणों में लगे अलग-अलग कीमती पत्थरों की भी जांच की जा रही है।
रत्न विशेषज्ञों की भी ली जा रही मदद
इन्वेंट्री के दौरान जेमोलॉजिस्ट यानी रत्न विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कई आभूषणों में हीरे और अन्य कीमती पत्थर जड़े हुए हैं, इसलिए उनकी पहचान और मूल्यांकन में विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इन्वेंट्री के दौरान मंदिर में पूजा-पाठ की व्यवस्था भी सामान्य रूप से जारी रखी गई है। श्रद्धालुओं को दर्शन में परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
1 सितंबर को भी जारी रहेगा इन्वेंट्री का काम
प्रशासन के अनुसार रत्न भंडार की इन्वेंट्री का काम 1 सितंबर को भी जारी रहेगा। वहीं, मंदिर के नाट मंडप में एयर-कंडीशनिंग की सुविधा भी शुरू की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से राहत मिल सके।



