कारगिल विजय दिवस: उत्तराखंड के 75 वीरों ने देश के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान
आज भी उनकी गाथा करती है गर्व से सिर ऊंचा

देहरादून। 26 जुलाई का दिन देश के लिए गर्व और सम्मान का दिन है। आज ही के दिन 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय को सफल बनाते हुए कारगिल की चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ दिया था। इस ऐतिहासिक जीत में उत्तराखंड के वीर जवानों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। कारगिल युद्ध में शहीद हुए 527 भारतीय सैनिकों में 75 जवान अकेले उत्तराखंड के थे, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
कारगिल में उत्तराखंड के वीरों ने लिखा शौर्य का इतिहास
कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के कई जवानों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। मेजर विवेक गुप्ता ने तोलोलिंग की कठिन लड़ाई का नेतृत्व करते हुए वीरगति प्राप्त की, जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। वहीं मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने भी दुश्मनों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया और उन्हें भी मरणोपरांत महावीर चक्र मिला।
गढ़वाल और कुमाऊं रेजीमेंट ने दिखाया अदम्य साहस
कारगिल की बर्फीली चोटियों पर गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। गढ़वाल राइफल्स के 47 और कुमाऊं रेजीमेंट के 16 जवान इस युद्ध में शहीद हुए। उनके साहस के लिए उत्तराखंड के सैनिकों को 39 वीरता पदकों से सम्मानित किया गया।
आज भी याद है वह भावुक पल
कारगिल युद्ध के दौरान लैंसडाउन स्थित गढ़वाल रेजीमेंटल सेंटर में एक साथ 9 शहीद जवानों के पार्थिव शरीर पहुंचे थे। तिरंगे में लिपटे वीरों को अंतिम विदाई देने हजारों लोग उमड़ पड़े थे। हर आंख नम थी, लेकिन हर दिल अपने वीर सपूतों पर गर्व से भरा हुआ था।
सीएम धामी बोले- देश हमेशा ऋणी रहेगा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस पर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उत्तराखंड के वीर जवानों ने दुर्गम चोटियों पर अद्भुत साहस दिखाकर देश का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इन अमर बलिदानियों की वीरगाथाएं आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेंगी।
कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक जीत की कहानी नहीं, बल्कि उन वीरों के बलिदान की याद है, जिनकी वजह से आज देश सुरक्षित और गर्व के साथ खड़ा है। 🇮🇳

