छत्तीसगढ़ के 145 नर्सिंग कॉलेजों के लिए बड़ा अपडेट: INC की जगह आएगा नेशनल नर्सिंग कमीशन
बदलेंगे मान्यता के नियम

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नर्सिंग कॉलेजों और नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ा बदलाव होने वाला है। जल्द ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) की जगह नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन (NNMC) लागू किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, शिक्षा की गुणवत्ता और नियमन से जुड़े नियम पहले से ज्यादा सख्त हो जाएंगे। हालांकि अभी यह व्यवस्था देश के किसी भी राज्य में लागू नहीं हुई है।
नर्सिंग कॉलेजों पर बढ़ेगी सख्ती
विशेषज्ञों के मुताबिक, NNMC लागू होने के बाद सरकारी और निजी दोनों तरह के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता नए मानकों के आधार पर तय होगी। फिलहाल छत्तीसगढ़ में 145 नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं, जिनमें 7,700 से ज्यादा सीटों पर बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई होती है। नए नियम लागू होने के बाद कॉलेजों को गुणवत्ता, फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कड़े मापदंडों का पालन करना होगा।
INC एक्ट 1947 खत्म, लेकिन पुराने नियम अब भी लागू
केंद्र सरकार ने नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक व्यवस्था लागू करने के लिए 2024 में नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन कानून पारित किया था। इसके साथ ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल एक्ट 1947 निरस्त हो गया। गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है, लेकिन जब तक नया कमीशन राज्यों में लागू नहीं होता, तब तक पुराने INC के नियमों के आधार पर ही कामकाज जारी रहेगा।
कई कॉलेज अभी भी मानकों पर नहीं खरे
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के करीब 25 प्रतिशत नर्सिंग कॉलेज अभी भी INC के तय मापदंडों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते। इसके बावजूद हर साल उन्हें मान्यता मिलती रही है। कई कॉलेजों के पास लंबे समय तक सूटेबिलिटी सर्टिफिकेट भी नहीं था। इसी वजह से दो साल पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय हेल्थ साइंस एवं आयुष विश्वविद्यालय ने 11 निजी कॉलेजों को संबद्धता देने से इनकार कर दिया था। बाद में जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर उन्हें मंजूरी दी गई।
सीटें बढ़ीं, फिर भी हजारों सीटें रहीं खाली
पिछले साल राज्य में बीएससी नर्सिंग की कुल 7,751 सीटें उपलब्ध थीं। सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया आसान बनाने के लिए 10 परसेंटाइल तक के छात्रों को भी एडमिशन की अनुमति दी थी। इसके बावजूद 2,329 सीटें खाली रह गईं और सिर्फ 5,422 छात्रों ने प्रवेश लिया। चार राउंड की काउंसलिंग के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से नर्सिंग शिक्षा की मांग और गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठे।
क्या बदलेगा नए कमीशन में?
नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन लागू होने के बाद सभी राज्यों में स्टेट नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन का गठन किया जाएगा। यह आयोग नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, पंजीकरण, आचार संहिता, पेशेवर व्यवहार और कौशल आधारित परीक्षाओं की निगरानी करेगा। साथ ही राज्य आयोग के फैसलों के खिलाफ नेशनल कमीशन में अपील करने की भी व्यवस्था होगी, जिससे छात्रों और संस्थानों को पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।
नए सिस्टम से उम्मीद की जा रही है कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, फर्जी या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले संस्थानों पर लगाम लगेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।

