नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, कार्डियक अरेस्ट ने ली जान; 100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। बताया गया कि सुबह करीब 5:20 बजे उनका निधन हुआ। घटना के समय घर पर परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर वहां मौजूद थे। शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और अंतिम संस्कार पुणे स्थित फार्महाउस में होने की जानकारी सामने आई है।
फिल्मी करियर में तीन बार मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक लंबे करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में अन्ना का किरदार निभाने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इस तरह उन्हें कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
रात में दोस्त को भेजा था तबीयत खराब होने का संदेश
जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे एक दोस्त को संदेश भेजकर तबीयत ठीक नहीं होने की बात कही थी। दोस्त ने उस समय संदेश नहीं देखा। बाद में फोन करने पर वह करीब 4 बजे नाना के घर पहुंचा। उस समय नाना को काफी पसीना आ रहा था और उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। कुछ देर बाद वह बेहोश होने लगे। इसके बाद केयरटेकर को अस्पताल भेजा गया और एंबुलेंस बुलाई गई। इमरजेंसी टीम ने घर पहुंचकर कार्डियक मसाज शुरू की। उन्हें सुबह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
‘वेलकम’ के उदय शेट्टी से मिली अलग पहचान
नाना पाटेकर ने गंभीर भूमिकाओं के साथ कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘वेलकम’ में उन्होंने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। उनका यह किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। फिल्म के कई संवाद आज भी लोगों के बीच चर्चित हैं। इसके बाद वह ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के रूप में नजर आए।
सेना से रहा गहरा जुड़ाव, कारगिल युद्ध में भी पहुंचे
फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में सेना अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए नाना पाटेकर ने भारतीय सेना के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ करीब तीन साल तक प्रशिक्षण किया। इसके बाद वह टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े और उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद पर भी सेवाएं दीं।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी नाना पाटेकर सेना के साथ रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर करीब दो महीने अग्रिम क्षेत्रों में बिताए थे। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे इलाकों में पहुंचे थे।
किसानों की मदद के लिए शुरू किया ‘नाम फाउंडेशन’
नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत की थी। संस्था ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों और उनके परिवारों की मदद की। किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ बच्चों की पढ़ाई और स्कूल-कॉलेज की फीस में भी मदद की गई।
संस्था ने गांवों में पानी की समस्या दूर करने के लिए तालाब, कुएं और चेक डैम बनाने जैसे काम भी किए। नाना पाटेकर ने किसानों की आर्थिक स्थिति देखकर कई बार अपनी निजी इच्छाओं को भी पीछे रखा। उनसे जुड़ा एक किस्सा है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लग्जरी कार खरीदने के बजाय उन्होंने यह रकम जरूरतमंद परिवारों की मदद में लगाने का फैसला किया था।
नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके अभिनय और यादगार किरदारों को आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।



