झीरम घाटी केस में आज नहीं आया फैसला, NIA कोर्ट ने तारीख बढ़ाई; भूपेश बघेल ने जांच पर उठाए सवाल

कांकेर। बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। 31 अगस्त को फैसले की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन सुनवाई के बाद अदालत ने फैसले की तारीख आगे बढ़ा दी है।
फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।
‘षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं हुई’
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि झीरम घाटी हमले के पीछे मौजूद कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी। बघेल के मुताबिक, राज्य में SIT गठित किए जाने के बाद NIA हाईकोर्ट पहुंच गई थी।
उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार पर भी मामले की आगे जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे ऐसा लगता है कि भाजपा इस मामले को दबाना चाहती है।
टीएस सिंहदेव भी उठा चुके हैं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इससे पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी झीरम घाटी घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे।
सिंहदेव ने कहा था कि वह खुद घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं और जगदलपुर पहुंचकर NIA के सामने अपनी आंखों देखी घटना का बयान दर्ज करा चुके हैं।
उनके मुताबिक, घटना वाले दिन पूरे इलाके में पुलिस की मौजूदगी लगभग शून्य थी और रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात नहीं था। उन्होंने कहा था कि अगर जांच और फैसले में इन तथ्यों को जगह मिलती है और घटना की जिम्मेदारी तय होती है, तभी पीड़ितों और कांग्रेस नेताओं को न्याय मिलने का संतोष होगा।
क्या है झीरम घाटी हत्याकांड?
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा स्थित झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया।
इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं की मौत हुई थी। हमले में सुरक्षा बलों के जवानों और आम लोगों की भी जान गई थी।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में से एक माना जाता है।




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