छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, फिलहाल पुरानी नीति लागू; 21 क्विंटल बोनस पर फैसला नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी। इस वर्ष भी खरीदी फिलहाल पुरानी नीति के तहत ही की जाएगी और नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल से कम धान बेचने या कम उत्पादन होने पर भी पूरे 21 क्विंटल के हिसाब से बोनस देने के प्रस्ताव पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
एकात्म परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया कि सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और मामला अभी प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदेगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि एपीएल और बीपीएल परिवारों को जनवरी से राशन में सुपर फाइन यानी बिना टुकड़े वाला चावल उपलब्ध कराने की योजना है।
3100 उपार्जन केंद्रों पर होगी खरीदी
किसानों को धान बेचने में सुविधा देने के लिए इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से खरीदी होगी। सभी केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं और पर्याप्त नए व पुराने जूट बारदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वास्तविक किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू रहेगी। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ से केंद्रीय पूल में 73 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अवैध धान परिवहन रोकने के लिए निगरानी मजबूत
धान के अवैध परिवहन, पुनर्चक्रण और खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ का विस्तार किया जाएगा। सीमावर्ती राज्यों से अवैध धान की आवक रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके लिए प्रदेश में 273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र चिन्हांकित किए गए हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा तय की गई है। अति संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का समाधान 24 घंटे, संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का 48 घंटे और सामान्य केंद्रों की शिकायतों का 72 घंटे के भीतर किया जाएगा।
क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग से होगी निगरानी
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग और ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। इससे परिवहन की निगरानी और चावल के पुनर्चक्रण पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
धान के परिवहन के लिए लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से लैस वाहनों का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके।
‘तुंहर टोकन’ एप से घर बैठे मिलेगा टोकन
किसानों को समितियों में लंबी कतारों से राहत देने के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सुविधा दी जाएगी। एप पर किसान ओटीपी के जरिए पंजीयन कर सकेंगे।
प्रत्येक समिति की प्रतिदिन की खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन एप के जरिए और 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर पर जारी होंगे। एप से जारी टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों और 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित की गई है।
किसानों के रकबे के आधार पर टोकन की संख्या भी तय की गई है। दो एकड़ तक के किसानों को एक टोकन, दो से 10 एकड़ तक के किसानों को दो टोकन और 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को तीन टोकन दिए जाएंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि नए उपार्जन केंद्रों, ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और तकनीक आधारित निगरानी से धान खरीदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाया जाएगा।



