अमेरिका से 10 अरब डॉलर की आर्थिक मदद चाहता पाकिस्तान, ट्रंप प्रशासन के सामने रखा प्रस्ताव

गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है। यह मांग ‘बायलैटरल एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी’ के तहत की गई है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी और वित्तीय स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव के दौरान खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने के बाद पाकिस्तान ने यह आर्थिक सहायता मांगी है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के समक्ष रखा गया है। हालांकि, अब तक अमेरिका की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या मंजूरी नहीं मिली है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिका सहयोगी देशों को विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए डॉलर, मुद्रा स्वैप या वित्तीय गारंटी जैसी सहायता उपलब्ध करा सकता है। यदि पाकिस्तान को यह सुविधा मिलती है तो उसके विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, पाकिस्तानी रुपये पर दबाव में कमी, आयात भुगतान और बाहरी कर्ज चुकाने में राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पाकिस्तान इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधारों को लागू कर रहा है। इन सुधारों के तहत सरकार को करों में वृद्धि, सब्सिडी में कटौती और सरकारी खर्च कम करने जैसे कदम उठाने पड़े हैं, जिसका असर आम जनता पर महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के रूप में दिखाई दे रहा है।
पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि यदि अमेरिका का समर्थन मिलता है तो विश्व बैंक, IMF और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से अतिरिक्त आर्थिक सहायता हासिल करना आसान हो जाएगा। फिलहाल अमेरिका की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई निर्णय सामने नहीं आया है। यदि सहायता मंजूर होती है तो पाकिस्तान को अल्पकालिक आर्थिक राहत मिल सकती है, जबकि प्रस्ताव खारिज होने की स्थिति में उसे IMF और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों पर ही अधिक निर्भर रहना पड़ेगा।

