रघु ठाकुर का ‘Gen-Z’ जैसे विदेशी शब्दों पर निशाना, बोले- जन आंदोलनों में विदेशी नैरेटिव हावी; सच्चे आंदोलन के बताए 5 मूल तत्व

बिलासपुर। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के संस्थापक, राष्ट्रीय संरक्षक और समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने ‘Gen-Z’ जैसे विदेशी शब्दों के बढ़ते इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आज जन आंदोलनों और सार्वजनिक विमर्श में विदेशी सहयोग और नैरेटिव का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में ‘जन आंदोलन : दशा और दिशा’ विषय पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए ठाकुर ने कहा कि आज के कई आंदोलन स्वतःस्फूर्त होने के बजाय प्रायोजित नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनों के लक्ष्य सीमित होने के कारण उनका व्यवस्था पर व्यापक असर नहीं पड़ता और गंभीर मुद्दों के बजाय सतही विषयों को ज्यादा उठाया जा रहा है।
हालांकि, उन्होंने माना कि हालिया आंदोलनों से सरकार कुछ हद तक असहज हुई है और नई पीढ़ी के लोगों की आंदोलन में भागीदारी बढ़ी है।
आंदोलन में हिंसा और अभद्र भाषा के खिलाफ
ठाकुर ने दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल, तोड़फोड़ और हिंसा पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में गाली-गलौज, पथराव और तोड़फोड़ के लिए जगह नहीं होनी चाहिए।
‘विदेशी ताकतों का एजेंडे पर प्रभाव’
रघु ठाकुर ने आरोप लगाया कि दुनिया के कई देशों में तैयार किए जा रहे एजेंडों के पीछे विदेशी ताकतों का प्रभाव है। उन्होंने फ्रांसिस फुकुयामा की पुस्तक ‘द एंड ऑफ हिस्ट्री’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता और समाजवाद के विचारों को कमजोर कर केवल पूंजीवाद और असमानता को प्रमुख व्यवस्था के तौर पर स्थापित करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि वास्तविक सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने के बजाय लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक टकराव में उलझाया जा रहा है।

सच्चे जन आंदोलन के बताए 5 मूल तत्व
रघु ठाकुर ने कहा कि एक वास्तविक जन आंदोलन में पांच महत्वपूर्ण तत्व होने चाहिए—
1. आंदोलन स्वतःस्फूर्त होना चाहिए।
2. यह विदेशी फंडिंग या कॉर्पोरेट संसाधनों के बजाय जनता के अपने साधनों से चलना चाहिए।
3. इसका लक्ष्य केवल तत्काल लाभ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।
4. आंदोलन में गाली-गलौज, पथराव और तोड़फोड़ जैसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
5. आंदोलन की अभिव्यक्ति तार्किक, संयमित और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।
अन्ना आंदोलन को बताया प्रायोजित
ठाकुर ने 2010-11 के अन्ना आंदोलन को प्रायोजित बताते हुए कहा कि इससे सरकारें तो बदलीं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
NEET पेपर लीक का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जब कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं का मामला सामने आया, तब बड़े नेता विदेश दौरों पर थे। उन्होंने कहा कि महीनों बाद सड़क पर उतरना वास्तविक जनहित के बजाय प्रायोजित राजनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के साथ व्यवहार पर जताई चिंता
रघु ठाकुर ने महाराष्ट्र में गैर-मराठी और हिंदी भाषियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हिंदी को लेकर महाराष्ट्र में हुए विवाद का जिक्र करते हुए सरकार और केंद्र के रवैये पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध किए जाने पर केंद्र ने समग्र शिक्षा का करीब 2,000 करोड़ रुपये का अनुदान रोक दिया, जबकि महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर केंद्र ने चुप्पी साधे रखी।
ठाकुर ने पुणे के एक छात्र द्वारा हिंदी बोलने के कारण कथित प्रताड़ना के बाद आत्महत्या का भी उल्लेख किया और इसे ‘नया भाषाई साम्राज्यवाद’ करार दिया।
प्रेस वार्ता में वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवारी, जावेद उस्मानी समेत रघु ठाकुर के समर्थक मौजूद रहे।



