एक साल बाद भी बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास अधूरा, स्थायी आवास की राह देख रहे ग्रामीण

लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के मांदर गांव में 26 अगस्त 2025 को आई भीषण बाढ़ की त्रासदी का दर्द आज भी लोगों के बीच कायम है। नानी बहार नाले में आई बाढ़ ने दर्जनों परिवारों के घर उजाड़ दिए थे, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवार स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हित तो की, लेकिन वह उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं थी। प्रभावितों का आरोप है कि कई परिवारों को अलग-अलग भूखंड आवंटित नहीं किए गए। साथ ही प्रस्तावित स्थान दूर होने और बरसात के दौरान आवागमन में होने वाली परेशानी भी पुनर्वास की राह में बड़ी बाधा बनी।
कई प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, इसलिए पुश्तैनी जमीन छोड़कर दूसरी जगह बसना उनके लिए आसान नहीं है। कुछ लोगों को मुआवजा मिला, लेकिन संयुक्त परिवारों में सभी प्रभावितों को समान रूप से राहत नहीं मिल सकी।
स्थिति को देखते हुए अब अधिकांश परिवार अपनी ही जमीन पर अपेक्षाकृत ऊंचे स्थान पर नए मकान बना रहे हैं। वहीं नाले के किनारे स्थित कई घरों में दरारें आने से भविष्य को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि पुनर्वास की ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे उनकी खेती भी सुरक्षित रहे और भविष्य में बाढ़ जैसी आपदा से जान-माल का नुकसान न हो। एक वर्ष बीतने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिलने से प्रभावित परिवारों में निराशा बनी हुई है।

