SIR विवाद पर मुरली मनोहर जोशी बोले- निष्पक्ष चुनाव जरूरी, संविधान का उल्लंघन हो तो SC देखे

नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेही और पारदर्शिता को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह हो और नौकरशाही पारदर्शी हो, तो जनता द्वारा चुनी गई सरकार व्यवस्था में बनी रहनी चाहिए।
जोशी ने यह बात दिल्ली में 21वें FICCI हायर एजुकेशन समिट से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के संबंध में उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए। अगर कहीं संविधान का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट को उस पर विचार करना चाहिए।
‘लोकतंत्र निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शिता पर टिका है’
जोशी ने कहा कि “जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा चुनी गई सरकार धरती से खत्म नहीं होगी, बशर्ते चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह हो और नौकरशाही पारदर्शी हो।” उन्होंने विपक्ष को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उसके पास स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुरूप चलनी चाहिए।
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और CEC के इस्तीफे की मांग के बीच दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग और बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया गलत
छात्रों के प्रदर्शन और उन पर बल प्रयोग के सवाल पर भी मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छात्रों की जायज मांगों को हमेशा सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए और लाठीचार्ज किसी समस्या का समाधान नहीं है।
जोशी ने छात्रों को ‘हमारे बच्चे’ बताते हुए कहा कि अगर किसी बच्चे को अपने पिता से कोई शिकायत है, तो उसकी बात सुनी जाती है और समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाती है। इसी तरह छात्रों की समस्याओं को भी संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए।
नई शिक्षा नीति पर बोले- अभी नतीजे बताना जल्दबाजी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व HRD मंत्री ने कहा कि अभी इसके परिणामों का आकलन करना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक नीति को लागू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और इसका क्रियान्वयन अभी जारी है। इसलिए इसके अंतिम परिणामों के बारे में अभी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।



