ईरान तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों के करीब 3 लाख करोड़ रुपये डूबे

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को शुरुआती कारोबार में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। बाजार में कमजोरी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, रुपये में गिरावट और वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव माना जा रहा है।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूटकर 76,857 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी में भी 210 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार पूरे समय दबाव में रहा। आईटी क्षेत्र की कुछ कंपनियों को छोड़ अधिकांश सेक्टोरल शेयरों में बिकवाली हावी रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किए गए दावों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 79-80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और एशियाई बाजारों में आई गिरावट ने भी घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया। अस्थिरता सूचकांक (VIX) में भी करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है।
बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार के करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर सोमवार को लगभग 479 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी कुछ ही घंटों के कारोबार में निवेशकों की संपत्ति में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर आगे की स्थिति शेयर बाजार की दिशा तय करेगी।

