भरंडा में मतांतरण विवाद से बढ़ा तनाव, गांव बना पुलिस छावनी; विशेष ग्रामसभा पर टिकी सबकी नजर

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरंडा गांव में मतांतरण (conversion) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक तनाव का रूप ले चुका है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बुधवार को बुलाई गई विशेष ग्रामसभा को लेकर पूरे जिले की निगाहें गांव पर टिकी हुई हैं।
ग्रामीणों ने विरोध किया
विवाद की शुरुआत 9 जून को हुई थी, जब कुछ मतांतरित परिवारों (conversion) की गतिविधियों और जनजातीय देवी-देवताओं के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया।
आदिवासी समाज ने इसे अपनी धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का अपमान बताया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दीपक ठाकुर और उनकी पत्नी भुवनेश्वरी ठाकुर को गिरफ्तार किया है।
इस घटना के बाद आदिवासी समाज ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं और युवाओं ने अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का संकल्प लेते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। हजारों लोगों की मौजूदगी ने आंदोलन को व्यापक जनआक्रोश का रूप दे दिया।
गिरफ्तारी के बाद भी गांव में तनाव कम नहीं
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद गांव में तनाव कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों और मतांतरित परिवारों (conversion) के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। बताया जा रहा है कि 26 मतांतरित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया है, जिसके चलते उन्हें गांव से अलग स्थान पर शरण लेनी पड़ रही है।
प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए अब तक 13 दौर की बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। आदिवासी समाज की मांग है कि संबंधित परिवार अपने मूल धर्म में लौटें, जबकि मतांतरित परिवार अपने धार्मिक निर्णय पर कायम हैं।
ऐसे में आज होने वाली विशेष ग्रामसभा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

