Chhattisgarh

पंडवानी की अमर आवाज थमी, पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 वर्ष की उम्र में निधन

छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात लोक गायिका डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और पिछले लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गनियारी में किया जाएगा।

डॉ. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारतीय लोक संस्कृति की पहचान बनाई। भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनके निधन से लोक कला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है और उन्होंने पंडवानी के माध्यम से राज्य का गौरव बढ़ाया।

तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। बचपन में वे अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनकर पंडवानी की ओर आकर्षित हुईं। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी और उस दौर की परंपराओं को तोड़ते हुए कापालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत करने वाली पहली महिला बनीं।

उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। समाज के विरोध और बहिष्कार का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी कला का साथ नहीं छोड़ा। औपचारिक शिक्षा से वंचित रहने के बावजूद उन्हें चार बार डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी.लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

पिछले करीब दो वर्षों से वे अस्वस्थ थीं। हाल ही में सांस लेने में तकलीफ और उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। आखिरकार शनिवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय लोक कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है।

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