TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को दी 20 दिन की मोहलत

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके चुनाव चिन्ह ‘फूल और घास’ को लेकर जारी विवाद अब निर्णायक कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज पेश करने के लिए 20 दिन का अतिरिक्त समय दिया।
दोनों गुटों को मिला अलग-अलग समय
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।
अदालत ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को अपना जवाबी हलफनामा और अन्य दस्तावेज दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। इसके बाद ममता बनर्जी के गुट को जवाब मिलने पर अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त 10 दिन दिए गए।
सुनवाई के दौरान ऋतब्रत बनर्जी के गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दशहरा उत्सव के कारण जरूरी गैर-न्यायिक स्टांप पेपर उपलब्ध नहीं हो सके। इस वजह से दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
चुनाव आयोग को चार महीने में फैसला करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को चुनाव आयोग को पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद पर चार महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों गुट अपने दावों के समर्थन में चुनाव आयोग के सामने पेश किए गए दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर सवाल उठा सकते हैं।
दोनों गुटों को मिले अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को विवाद के बीच दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए थे। अंतिम फैसला आने तक दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
* ममता बनर्जी का गुट: ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, चुनाव चिन्ह ‘फुटबॉल खिलाड़ी’।
* ऋतब्रत बनर्जी का गुट: डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, चुनाव चिन्ह ‘लिफाफा’।
चुनाव आयोग ने कहा था कि विवाद पर चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत विस्तृत फैसला लेने की जरूरत है।
शिवसेना विवाद भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित
राजनीतिक दल के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर शिवसेना का विवाद भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अदालत ने उस मामले में भी चुनाव आयोग से समयसीमा स्पष्ट करने और दोनों पक्षों को अपने साक्ष्य पेश करने का उचित अवसर देने की बात कही थी।
अब TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग की सुनवाई और दोनों गुटों की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर निर्भर करेगा।



