ईरानी हमले के खतरे के बीच ट्रंप ने बदला था विमान, मार्को रुबियो और स्कॉट बेसेंट को बनाया गया ‘डिकॉय’ फ्लाइट का हिस्सा

तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े संभावित हमले के खतरे के बीच ट्रंप को बेहद गोपनीय तरीके से एक विमान से दूसरे छोटे सैन्य विमान में शिफ्ट किया गया था। इस दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट उसी विमान में अमेरिका लौटे, जिसे ट्रंप का विमान समझा जा रहा था।
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कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के खतरे की थी आशंका
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी और तुर्की खुफिया एजेंसियों को संभावित खतरे की जानकारी मिली थी। आशंका थी कि ईरान से जुड़े लोग कंधे से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के जरिए ट्रंप के विमान को निशाना बना सकते हैं। अधिकारियों ने इस खतरे को गंभीर और तत्काल माना था।
इसके बाद ट्रंप को सार्वजनिक रूप से विमान में चढ़ते हुए दिखाया गया, लेकिन बाद में उन्हें एक कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप दूसरे छोटे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। इस विमान में उनके साथ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और कुछ करीबी सहयोगी मौजूद थे।
एयर फोर्स वन बना ‘डिकॉय’
ट्रंप के दूसरे विमान में चले जाने के बाद पहले विमान को ही सार्वजनिक तौर पर एयर फोर्स वन के रूप में आगे रवाना किया गया। इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, व्हाइट हाउस के अधिकारी और पत्रकार मौजूद थे। इसका मकसद ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को छिपाना और संभावित हमलावरों को भ्रमित करना था।
मार्को रुबियो को विमान बदलने और खतरे की जानकारी होने की बात सामने आई है, जबकि स्कॉट बेसेंट को इस पूरे ऑपरेशन की कितनी जानकारी थी, इसे लेकर रिपोर्टों में कुछ अंतर है।
ट्रंप ने खुद की विमान बदलने की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में विमान बदलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देश पर लिया गया था। ट्रंप के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारियों ने उनसे दूसरे विमान से यात्रा करने को कहा और उन्होंने उनकी बात मानी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं।
रुबियो और बेसेंट को उसी विमान में क्यों रखा गया?
मार्को रुबियो और स्कॉट बेसेंट को पहले विमान में रखने की एक अहम वजह राष्ट्रपति पद की उत्तराधिकार व्यवस्था भी मानी जा रही है। अमेरिकी व्यवस्था में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति और फिर कांग्रेस के शीर्ष पद आते हैं। इसके बाद कैबिनेट के सदस्य उत्तराधिकार क्रम में शामिल होते हैं। विदेश मंत्री रुबियो और वित्त मंत्री बेसेंट इसी क्रम में आते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित ईरानी खतरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि विमान में मौजूद कई पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कर्मचारियों को भी शुरुआत में पता नहीं था कि ट्रंप वास्तव में उस विमान में मौजूद नहीं हैं।



