अरुणाचल में बांध के विरोध में हिंसा, NHPC ऑफिस और थाने में आग लगाई
BJP प्रदेश अध्यक्ष और विधायकों के घरों में तोड़फोड़; पथराव में DSP समेत कई पुलिसकर्मी घायल, भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस छोड़ी

दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट क्षमता के प्रस्तावित सियांग हाइड्रो प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा ( Violence) भड़क गई। शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट में NHPC के कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी। पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद उन्हें भी आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और कुछ विधायकों के घरों को निशाना बनाया। पथराव में डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। हिंसा के दौरान एक आदिवासी संगठन के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस नुकसान का आकलन कर रही है। प्रस्तावित बांध को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से विरोध है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना से उनके इलाके, जमीन और पारंपरिक जीवन पर असर पड़ सकता है।
12 घंटे के बंद के दौरान बिगड़े हालात
सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में शुक्रवार को 12 घंटे का बंद बुलाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, बंद के दौरान सियांग जिले में करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ करने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों ( Violence) के पास कथित तौर पर दाओ, लाठियां और गुलेल थीं। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागे। मेबो में रनाघाट ब्रिज के पास भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस अब आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा से जुड़े नुकसान का आकलन कर रही है। घटना में घायल पुलिसकर्मियों की संख्या और संपत्ति को हुए नुकसान के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायकों के घरों में तोड़फोड़
हिंसा के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और विधायकों के घरों को भी निशाना बनाया गया। विधायक निनोंग एरिंग के मुताबिक, रात करीब 2 बजे 300 से 400 युवा उनके घर पहुंचे। उन्होंने घर में तोड़फोड़ की और संपत्ति लूट ली।
पासीघाट के डीएसपी टोनी तातक ने बताया कि प्रदर्शनकारी मेबो इलाके से आए थे। भीड़ ने आदि समुदाय के प्रमुख संगठन आदि बाने केबांग के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की। घटना के बाद पुलिस नुकसान का आकलन कर रही है।
हिंसा के कारण इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय संगठनों और प्रशासन के बीच विवाद अब कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है।
प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें
बंद का आह्वान चार संगठनों ने मिलकर किया था। प्रदर्शनकारी परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के साथ अपनी अन्य मांगों को लेकर भी आंदोलन कर रहे हैं।
- गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
- निलंबित किए गए गांव के मुखियाओं को फिर से बहाल किया जाए।
- सियांग प्रोजेक्ट से जुड़े शुरुआती सर्वे बंद किए जाएं।
- इलाके में तैनात अर्धसैनिक और केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाया जाए।
प्रदर्शनकारियों ( Violence) का विरोध मुख्य रूप से प्रस्तावित बांध के लिए की जा रही शुरुआती जांच और सर्वे गतिविधियों को लेकर है। स्थानीय संगठनों की आशंका है कि परियोजना से उनके क्षेत्र में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
चीन के बांध के जवाब में भारत की बड़ी परियोजना
प्रस्तावित सियांग प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में सियांग नदी पर बनाया जाना है। इसकी नियोजित क्षमता 11,200 मेगावाट है। सियांग नदी तिब्बत से निकलती है। अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है।
इस परियोजना को चीन की ओर से तिब्बत में बनाई जा रही विशाल जलविद्युत परियोजना के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन इसी नदी तंत्र पर करीब 60,000 मेगावाट क्षमता की परियोजना बना रहा है। भारत को आशंका है कि चीन की ओर से नदी के पानी के प्रवाह में बदलाव या अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारत की प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन के साथ नदी के पानी के प्रवाह को बेहतर ढंग से समझना और संभावित जल संबंधी जोखिमों से निपटने की क्षमता बढ़ाना भी है। हालांकि, परियोजना के वास्तविक प्रभाव उसके डिजाइन, संचालन और जल प्रबंधन की व्यवस्था पर निर्भर करेंगे।
2022 में NHPC को मिली थी शुरुआती रिपोर्ट की जिम्मेदारी
अप्रैल 2022 में जल शक्ति मंत्रालय ने NHPC को सियांग परियोजना की शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था। इस रिपोर्ट के जरिए यह आकलन किया जाना है कि परियोजना तकनीकी और अन्य पहलुओं से कितनी व्यवहार्य है। वर्ष 2025 में परियोजना से जुड़ी तकनीकी जांच शुरू करने की कोशिशों के दौरान स्थानीय लोगों का विरोध सामने आने लगा था।
अब इस विरोध ने हिंसक रूप ले लिया है। एक ओर केंद्र सरकार के लिए नदी के पानी और चीन की परियोजना से जुड़े संभावित जोखिम महत्वपूर्ण हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों की चिंताएं और उनकी सहमति भी परियोजना के भविष्य के लिए अहम हैं।



