अरबों डॉलर खर्च के बाद भी खेलों में क्यों पिछड़ रहे हैं खाड़ी देश?

सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। बड़े फुटबॉल क्लब खरीदने, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी करने और विश्वस्तरीय स्टेडियम बनाने के बावजूद उनकी राष्ट्रीय टीमें उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों ने खेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर तो खूब निवेश किया, लेकिन जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने पर उतना ध्यान नहीं दिया। यही वजह है कि मजबूत खेल संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं का विकास अभी भी चुनौती बना हुआ है।
सऊदी प्रो लीग में दुनिया के बड़े फुटबॉलरों के आने से लीग की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन स्थानीय खिलाड़ियों को खेलने के कम मौके मिल रहे हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों के अधिकांश खिलाड़ी यूरोप की कठिन लीगों में खेलने नहीं जाते, जिससे उन्हें बड़े मुकाबलों का अनुभव नहीं मिल पाता।
छोटी आबादी और सीमित खेल संस्कृति भी इन देशों के लिए बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सऊदी अरब और कतर दोनों ही ग्रुप स्टेज से बाहर हो गए।
फुटबॉल के अलावा क्रिकेट, हॉकी और एशियन गेम्स जैसे अन्य खेलों में भी इन देशों का प्रदर्शन औसत रहा है। इससे साफ है कि केवल पैसा खर्च करने से खेलों में सफलता नहीं मिलती, बल्कि मजबूत जमीनी ढांचा, प्रतिभा विकास और लंबे समय की योजना भी उतनी ही जरूरी होती है।

